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वाराणसी

बीएचयू : तीन लाइब्रेरियन ने लिया एसोसिएट प्रोफेसर का इंटरव्यू

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महिला सदस्य की गैरमौजूदगी पर आपत्ति

वाराणसी। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) में प्रोफेसर पद के प्रमोशन के लिए हुए इंटरव्यू में यूजीसी के नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि प्रोफेसर पद के प्रमोशन के लिए बाहर से बुलाए गए तीन पूर्व लाइब्रेरियन ने इंटरव्यू लिया, जबकि इंटरव्यू पैनल में किसी प्रोफेसर का होना अनिवार्य था। यह इंटरव्यू विभाग की एक महिला एसोसिएट प्रोफेसर के प्रमोशन के लिए 16 अक्तूबर को आयोजित हुआ था।

पीड़ित महिला प्रोफेसर ने अपनी याचिका में यह भी आरोप लगाया है कि सेलेक्शन कमेटी में एक भी महिला सदस्य शामिल नहीं थी, जो यूजीसी रेगुलेशन 2018 के तहत आवश्यक है। यूजीसी के इस नियम के अनुसार, किसी महिला उम्मीदवार के इंटरव्यू के लिए सेलेक्शन कमेटी में एक महिला सदस्य का होना अनिवार्य है।

इस प्रकरण में पीड़ित एसोसिएट प्रोफेसर की याचिका पर सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के रूम नंबर 10 में सुनवाई होनी है। न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की अदालत में इस मामले पर जिरह होने की संभावना है।

पैनल में लाइब्रेरियन, प्रोफेसर नहीं

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सूत्रों के अनुसार, चयन प्रक्रिया के दौरान डिप्टी लाइब्रेरियन पद का भी इंटरव्यू चल रहा था। इंटरव्यू पैनल में दिल्ली यूनिवर्सिटी, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बंगलूरू, और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस मुंबई से आए तीन पूर्व लाइब्रेरियन शामिल थे। डिप्टी लाइब्रेरियन का इंटरव्यू खत्म होने के बाद, उन्हीं एक्सपर्ट्स ने प्रोफेसर पद का भी इंटरव्यू ले लिया। याचिका के अनुसार, यूजीसी के नियम के मुताबिक प्रोफेसर के इंटरव्यू के लिए एक प्रोफेसर का पैनल में होना अनिवार्य है।

महिला सदस्य की गैरमौजूदगी पर आपत्ति

पीड़ित प्रोफेसर ने यह भी आरोप लगाया है कि इंटरव्यू पैनल में किसी महिला सदस्य का न होना यूजीसी के नियमों का उल्लंघन है। यूजीसी रेगुलेशन 2018 के अनुसार, किसी भी महिला, ओबीसी या एससी-एसटी वर्ग के उम्मीदवार के इंटरव्यू में उसी वर्ग का एक सदस्य होना जरूरी है।

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