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पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुआ ‘अभिषेकात्मक अतिरुद्र महायज्ञ’

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जब कोई पुरुष दुविधा में पड़ता है तो महिला ही उसे निकालने का प्रयास करती है : प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी

गाजीपुर। जनपद के जखनियां क्षेत्र में स्थित सिद्धपीठ हथियाराम मठ में चल रहे 60 दिवसीय अभिषेकात्मक अतिरुद्र महायज्ञ और पार्थिव अर्चन की पूर्णाहुति आज पूर्णिमा के दिन किया गया। महामंडलेश्वर भवानी नंदन यति महाराज ने अपने ब्रह्मलीन गुरु महामंडलेश्वर स्वामी बालकृष्ण यति महाराज के चित्र पर दीप प्रज्वलित एवं माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरूआत की।

समापन समारोह के कार्यक्रम में आये हुये मुख्य अतिथि के रूप में बीएचयू के पूर्व कुलपति डॉ. गिरीश चन्द्र त्रिपाठी एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में काशी विद्यापीठ के डॉ. रजनीश राय एवं साधू संत एवं श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि अध्यात्म जगत में एक विख्यात सिद्ध पीठ हथियाराम मठ के 26 वें पीठाधीश्वर के रूप महामंडलेश्वर भवानी नंदन यति महाराज द्वारा लगातार चातुर्मास का कार्यक्रम विश्व के समस्त ज्योतिर्लिंगों पर चातुर्मास के समय काफी भव्य तरीके से आयोजित किया जाता रहा है। 11 वैदिक ब्राह्मण द्वारा मिलकर पूजा करना एवं 1 लाख पार्थिव बनाकर काशी जैसे विश्व के समस्त ज्योतिर्लिंग की चातुर्मास के महीने में पूजा अर्चना की जाती रही है। ठीक उसी प्रकार प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी हथियाराम मठ में स्थित बुढ़िया माई के प्रांगण में विगत 60 दिनों से चल रहे अभिषेकात्मक अतिरुद्र महायज्ञ और पार्थिव अर्चन की पूर्णाहुति 11 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा किया गया। जिसके मुख्य यजमान शिवानंद सिंह उर्फ झुन्ना सिंह अपने परिवार के साथ एक बड़े संकल्प को लेकर कार्यक्रम का सफल पूर्णाहुति किया।

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महाराज ने इस चातुर्मास के सफल कार्यक्रम के सहयोग के लिए शिवानंद सिंह उर्फ झुन्ना सिंह एवं पत्नी लीलावती सिंह व उनके दोनों पुत्रों श्रेयस सिंह (हनी) व शशांक सिंह (सनी) को आशीर्वाद दिया। वहीं कार्यक्रम में महाराज द्वारा बताया गया कि आने वाले शारदीय नवरात्र के भी मुख्य यजमान शिवानंद सिंह उर्फ झुन्ना सिंह ही होंगे। जैसे ही इसकी जानकारी कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं को हुई तब श्रद्धालुगणों ने ताली बजाकर यजमान का अभिवादन किया।

पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर भवानी नंदन यात्री महाराज ने आशीर्वचन देते हुए चातुर्मास अनुष्ठान की महत्व एवं सनातन संस्कृति को दृष्टिगत रखते हुए धर्म संस्कृति से जुड़ने का आवाहन किया और बताया कि सभी धर्म से बढ़कर मानवता ही एक ऐसा धर्म है जिसका हर मनुष्यों को पालन करना चाहिए। समय के साथ चलना ही उत्तम है, संत कभी मरता नहीं ,संत तो ब्रह्मलीन होते हैं। जरूरत पड़ने पर शास्त्र के साथ-साथ शस्त्र लेकर सीमा पर रक्षा करने के लिए हर समय मैं तैयार रहूंगा। यह सिद्धपीठ सिद्ध संतों के तपो स्थल की भूमि है। जहां मठ में स्थित बुढ़िया माता के दरबार में अगर पवित्र भाव से पूजा अर्चना किया जाय तो वह व्यर्थ नहीं जा सकता।

वहीं मुख्य अतिथि के रूप में बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने राष्ट्र के प्रति समर्पण के भावना से कार्य करने का आगाज किया, जहां भारत एक बार फिर विश्व गुरु बने। वही प्रोफेसर जीसी त्रिपाठी ने बताया कि सिद्धपीठ की धरती अत्यंत ही पावन एवं वन्दिनीय है जहां पर बुढ़िया माई के दरबार में दर्शन-पूजन कर सभी कष्टों का निवारण होता है।

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प्रोफेसर ने महाभारत के प्रसंग को बताया कि समाज की ज्यादा क्षति सज्जनों के मौन रहने से हुई हैं, न कि दुष्टों की दुष्टता से। जैसे महाभारत काल में भीष्म पितामह के मौन होने के कारण पूरा हस्तिनापुर नष्ट हो गया। अधिकार नहीं बल्कि कर्तव्य प्रधान देश है, भारत बनाना इसकी चिंता हमें नहीं बल्कि हम सबको करनी चाहिए। युवा परिपक्व नहीं होने के कारण असत्य के साथ खड़ा हो जाता है, जिन्हें सत्य का मार्ग दिखाना संतो को और बड़े बुजुर्गों की नैतिक जिम्मेदारी है। कर्तव्य का बोध हो, अधिकार की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, कर्तव्य बोध पर समाज खड़ा करना होगा।

वहीं महिलाओं के महत्व को बताते हुए कहा कि जब कोई पुरुष दुविधा में पड़ता है तो महिला ही उसे निकालने का प्रयास करती है। देश को महान बनाना है तो महिलाओं को आगे आना होगा। वहीं मंचासीन मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि तथा साधु संतों को अंग वस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर रत्नाकर त्रिपाठी द्वारा आए हुए सभी अतिथियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त उनके द्वारा किया गया।

आचार्य शंभूनाथ पाठक, डॉ. मंगला सिंह, देवराहा बाबा (बिरनो), सत्यानंद यति महाराज, मनीष पाण्डेय,डॉ. संतोष यादव, प्रवीण रॉय (योगी), अमिता दुबे,‌ रमेश सिंह (पप्पू), अश्विनी सिंह, कन्या महाविद्यालय की छात्राएं सहित देश के कोने-कोने में रहने वाले सिद्धपीठ से जुड़े शिष्यगण, पुलिस प्रशासन की टीम भी उपस्थित रही।

महाराज द्वारा अपने आशीर्वचन में समस्त श्रद्धालुगण एवं उपस्थित लोगों से प्रसाद लेने का आग्रह किया और कार्यक्रम का सफल संचालन सिद्धपीठ हथियाराम मठ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर भवानी नंदन यति महाराज ने किया।

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