भदोही
सीता ने राम के गले में डाली वरमाला, गूंजे सियाराम के जयकारे
अमीर पट्टी के मारुति धाम में रामलीला का मंचन, राम विवाह के बाद कैकेयी ने मांगा 14 वर्ष का वनवास
औराई। क्षेत्र के अमीर पट्टी स्थित मारुति धाम हनुमान मंदिर परिसर में श्री स्वामी रामानंद मारुति नंदन रामलीला समिति की ओर से आयोजित रामलीला के पांचवें दिन सीता विवाह और राम वनवास की लीला का मंचन किया गया। कलाकारों के सजीव अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
लीला के दौरान प्रभु श्रीराम ने भगवान शिव के विशाल धनुष को खंडित किया तो पूरा रामलीला परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद जनकपुर की महिलाएं माता सीता को लेकर श्रीराम के पास पहुंचीं। विवाह की रस्म के दौरान वरमाला पहनाए जाने के साथ ही पूरा क्षेत्र सियाराम के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
विवाह का समाचार मिलने पर महाराज दशरथ अयोध्या से बारात लेकर जनकपुर पहुंचे। हाथी-घोड़े, ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के बीच द्वाराचार की रस्म पूरी हुई। इसके बाद राम-सीता विवाह संपन्न हुआ। राम कलेवा के दौरान जनकपुर की महिलाओं ने अवधपुरी से आए लोगों के साथ पारंपरिक हंसी-मजाक किया। विवाह के बाद करीब एक महीने तक जनकपुर में रहने के पश्चात बारात अयोध्या लौट गई।
कैकेयी ने मांगा राम के लिए वनवास
अयोध्या लौटने के बाद महाराज दशरथ ने श्रीराम को उत्तराधिकारी बनाने का निर्णय लिया। गुरु वशिष्ठ से अनुमति लेने के बाद नगर में राम के राज्याभिषेक की घोषणा करवा दी गई। यह समाचार सुनकर दासी मंथरा महारानी कैकेयी के पास पहुंची और उन्हें अपनी बातों में उलझा लिया। मंथरा के बहकावे में आकर कैकेयी ने भरत के राज्याभिषेक और श्रीराम के लिए 14 वर्ष के वनवास का वरदान मांग लिया।
कैकेयी की मांग सुनकर महाराज दशरथ मूर्छित होकर गिर पड़े। इस दृश्य के मंचन से रामलीला परिसर में मायूसी छा गई। भावुक दर्शक कैकेयी के इस निर्णय पर नाराजगी जताते हुए अपने घरों की ओर लौट गए।
