गोरखपुर
संतकबीरनगर में उर्वरक दुकानों पर छापेमारी, 21 प्रतिष्ठानों की जांच में लिए गए 14 नमूने
खाद की गुणवत्ता और कालाबाजारी रोकने के लिए तीन संयुक्त टीमों ने की कार्रवाई, दुकानदारों को नोटिस जारी
संतकबीरनगर। जिले में उर्वरकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए कृषि विभाग की टीमों ने विभिन्न तहसीलों में उर्वरक प्रतिष्ठानों पर औचक छापेमारी की। जिलाधिकारी के निर्देश पर कृषि विभाग और मजिस्ट्रेट की तीन संयुक्त टीमें गठित कर जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान कुल 21 उर्वरक दुकानों का निरीक्षण कर 14 नमूने लिए गए। जांच के दौरान अनियमितताएं मिलने पर संबंधित दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. सर्वेश कुमार यादव ने बताया कि शासन के निर्देश के क्रम में जिले की तीनों तहसीलों में उर्वरक प्रतिष्ठानों की जांच के लिए संयुक्त टीमें गठित की गई थीं। तहसील मेहदावल में जिला कृषि अधिकारी डॉ. सर्वेश कुमार यादव और उपजिलाधिकारी के नेतृत्व में टीम ने छापेमारी की। तहसील धनघटा में भूमि संरक्षण अधिकारी दीप चंद्र चौरसिया और उपजिलाधिकारी की टीम ने जांच की। वहीं, तहसील खलीलाबाद में उप कृषि निदेशक डॉ. राकेश कुमार सिंह और उपजिलाधिकारी के नेतृत्व में अभियान चलाया गया।
छापेमारी के दौरान तहसील धनघटा में आठ दुकानों का निरीक्षण कर तीन उर्वरक नमूने लिए गए। खलीलाबाद तहसील में पांच दुकानों की जांच कर दो नमूने लिए गए। वहीं, मेहदावल तहसील में आठ दुकानों का निरीक्षण करते हुए नौ नमूने एकत्र किए गए। इस प्रकार तीनों तहसीलों में कुल 21 दुकानों की जांच कर 14 नमूने लिए गए। इनमें मुख्य रूप से डीएपी, एसएसपी और एनपीके उर्वरक शामिल हैं।
जांच अभियान के दौरान साधन सहकारी समिति पश्चिम टोला, संतोष खाद भंडार बड़या ठाठर, नव दुर्गा ट्रेडर्स बड़या ठाठर, साधन सहकारी समिति भितिया कला, साहनी खाद भंडार नवलखा कुटी, गुप्ता खाद भंडार हरपुर, कृष्णमूर्ति कृषक सेवा जमोहरा और सिंह खाद भंडार सरफरा समेत विभिन्न प्रतिष्ठानों की जांच की गई।
जिला कृषि अधिकारी के अनुसार, मेहदावल तहसील के गुप्ता खाद भंडार हरपुर में अभिलेख अद्यतन नहीं पाए जाने पर दुकानदार को नोटिस जारी किया गया। विभाग की ओर से जारी जानकारी में एक दुकान का लाइसेंस निलंबित करने और तीन दुकानदारों को नोटिस जारी करने की भी बात कही गई है।
जांच के दौरान लिए गए उर्वरक नमूनों को परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। यदि जांच रिपोर्ट में नमूने अमानक पाए जाते हैं, तो उर्वरक नियंत्रण आदेश के प्रावधानों के तहत संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि खरीफ सीजन में बुवाई पूरी होने के बाद फसलों की बढ़वार के लिए किसानों को यूरिया की आवश्यकता बढ़ रही है। ऐसे में उर्वरकों की गुणवत्ता बनाए रखने, निर्धारित मानकों के अनुसार बिक्री सुनिश्चित करने और कालाबाजारी रोकने के लिए औचक छापेमारी अभियान आगे भी जारी रहेगा।
