गाजीपुर
मनरेगा में भ्रष्टाचार की परतें उजागर, डीसी से जेई तक पर उठे सवाल
कागज़ों में निस्तारण, ज़मीन पर घोटाला! IGRS जांच में फंसी गाजीपुर प्रशासनिक मशीनरी
करंडा (गाजीपुर)। जिले के करंडा विकास खंड अंतर्गत ग्राम सुआपुर में मनरेगा योजना के तहत कराए गए कार्यों में गंभीर अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। मामले में आईजीआरएस संदर्भ संख्या 40019525038981 के माध्यम से की गई शिकायत का बिना वास्तविक जांच के फर्जी निस्तारण किए जाने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता अमित उपाध्याय द्वारा जिलाधिकारी गाजीपुर को दिए गए प्रार्थना-पत्र में कहा गया है कि डीसी मनरेगा विजय कुमार यादव, खंड विकास अधिकारी करंडा शुवेदिता सिंह, एपीओ करंडा नितीश सिंह एवं जेई मनरेगा संजय सिंह द्वारा शिकायत की निष्पक्ष जांच न कराकर मनमाने ढंग से किसी दूसरे व्यक्ति की रिपोर्ट लगाकर निस्तारण कर दिया गया। शिकायत में स्पष्ट आरोप है कि मनरेगा कार्यों का भौतिक सत्यापन नहीं कराया गया, इसके बावजूद कागजों में कार्य पूर्ण दिखाकर भुगतान किया गया। मस्टर रोल में फर्जी नाम जोड़कर मजदूरी भुगतान, एक ही फोटो का उपयोग कर कई मस्टर रोल में फर्जी हाजिरी, तथा बिना जीपीएस लोकेशन के फोटो अपलोड कर लाखों रुपये का भुगतान कराए जाने की बात कही गई है।
आरोप यह भी है कि शिकायत दर्ज होने के बाद भी डीसी मनरेगा द्वारा कोई स्थलीय या स्वतंत्र जांच नहीं कराई गई, जिससे पूरे प्रकरण का वास्तविक खुलासा ही नहीं हो सका। शिकायतकर्ता का कहना है कि मामले में जानबूझकर उच्च स्तरीय जांच से बचते हुए फर्जी निस्तारण किया गया।
शिकायत में मांग की गई है कि आईजीआरएस शिकायत संख्या 40019525038981 के फर्जी निस्तारण में शामिल अधिकारियों की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई, निलंबन एवं FIR दर्ज की जाए। शिकायत के साथ विभाग द्वारा किए गए फर्जी निस्तारण की प्रति भी संलग्न की गई है और फिर मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज की गई है। अब यह देखना अहम होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कार्रवाई करता है।
