गोरखपुर
मृतक शिक्षकों के परिजनों संग ग्रामीणों ने शव रखकर किया चक्का जाम
ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक की गिरफ्तारी व मुआवज़े की मांग पर अड़े रहे लोग
एसडीएम खजनी के आश्वासन के बाद पांच घंटे में खुला मार्ग
गोरखपुर। न्याय और मुआवज़े की मांग को लेकर मंगलवार को हरपुर-बुदहट थाना क्षेत्र अंतर्गत कटसहरा–सिसवा सोनबरसा बाबू मार्ग पर हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए, जब सड़क हादसे में जान गंवाने वाले दो शिक्षकों के परिजन और ग्रामीण सड़क पर उतर आए। आक्रोशित ग्रामीणों ने शवों को मार्ग पर रखकर चक्का जाम कर दिया, जिससे क्षेत्र में घंटों अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही।
सोमवार को खजनी थाना क्षेत्र के जैतपुर चौराहे के समीप नन्दापार गांव के पास हुए दर्दनाक सड़क हादसे में ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आने से प्रधानाचार्य रामपाल चौधरी और शिक्षक सुबोध गौतम की मौके पर ही मौत हो गई थी। दोनों शिक्षक नेशनल गर्ल्स इंटर कॉलेज, समुदा सोनबरसा बाबू में कार्यरत थे और शिक्षा जगत में सम्मानित स्थान रखते थे। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई थी।
मंगलवार सुबह करीब छह बजे हरपुर-बुदहट थाना क्षेत्र के पचौरी चौराहे पर बड़ी संख्या में ग्रामीण जुट गए। देखते ही देखते दोनों दिवंगत शिक्षकों के शव सड़क पर रख दिए गए और मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया गया। जाम के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
प्रदर्शन कर रहे लोगों की प्रमुख मांगें थीं—हादसे के लिए जिम्मेदार फरार ट्रैक्टर चालक की तत्काल गिरफ्तारी, पीड़ित परिवारों को पर्याप्त और सम्मानजनक मुआवज़ा तथा प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन। परिजनों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों का आक्रोश नारों के रूप में फूट पड़ा—
“यहां गरीब की नहीं, सिर्फ दौलत वालों की सुनवाई होती है।”
घटनास्थल पर भावुक दृश्य देखने को मिले। दोनों मृत शिक्षकों की पत्नियां अपने जीवनसाथी के शव के पास बदहवास बैठी रहीं। मासूम बच्चों की आंखों से बहते आंसू देखकर हर कोई गमगीन हो उठा। भीड़ में एक ही सवाल गूंज रहा था—अब इन परिवारों का सहारा कौन बनेगा?
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर एसडीएम खजनी राजेश प्रताप सिंह, सीओ खजनी शिल्पा कुमारी सहित कई थानों के इंस्पेक्टर, एसओ और भारी पुलिस बल पहुंचा। प्रशासन की ओर से लगातार समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन परिजन लिखित आश्वासन के बिना हटने को तैयार नहीं थे।
मृतक परिवारों ने प्रशासन के समक्ष लिखित मांगपत्र सौंपा, जिसमें दोनों परिवारों के एक-एक सदस्य को संविदा पर नौकरी, सरकारी आर्थिक सहायता, ट्रैक्टर अथवा भट्ठा मालिक पर सख्त कार्रवाई व गिरफ्तारी, ₹50 लाख का मुआवज़ा, दोनों विधवाओं को सरकारी नौकरी तथा बच्चों की शिक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी सरकार द्वारा उठाने की मांग शामिल थी।
काफी देर तक चले तनावपूर्ण संवाद के बाद एसडीएम खजनी ने मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया। प्रशासनिक आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने आपसी सहमति से धरना-प्रदर्शन समाप्त कर दिया।
इसके पश्चात भारी पुलिस सुरक्षा के बीच दोनों शिक्षकों के शवों को अंतिम संस्कार के लिए सरयू नदी स्थित बिड़हरघाट ले जाया गया। जाम समाप्त होने के बाद मार्ग पर आवागमन बहाल हो गया और हालात सामान्य हुए।
हालांकि क्षेत्र में फिलहाल शांति है, लेकिन यह हादसा सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक संवेदनशीलता को लेकर कई सवाल खड़े कर गया है। पीड़ित परिवार अब प्रशासन की अगली ठोस कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
