वाराणसी
आईआईटी बीएचयू : एग्रीफूड सिस्टम में क्रांतिकारी बदलाव के लिए विशेषज्ञों ने किया मंथन
वाराणसी। पूर्वी उत्तर प्रदेश के एग्रीफूड सिस्टम में नए तकनीकी नवाचारों और शोध विचारों को लागू कर किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने के लिए आईआईटी बीएचयू ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। इस पहल के तहत प्रिसीजन फार्मिंग और खेतों के डिजिटलीकरण जैसे आधुनिक उपायों से कृषि क्षेत्र को अधिक प्रभावशाली और डेटा-संचालित बनाया जाएगा। किसानों को तकनीक से जोड़कर उनकी बाजार तक पहुंच और लाभप्रदता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
आईआईटी बीएचयू द्वारा तैयार किए गए एग्रीबिज़नेस पार्क के प्राथमिक ड्राफ्ट पर आयोजित ब्रेनस्टॉर्मिंग सत्र का तीसरा संस्करण आज इरी के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आइसार्क) में सम्पन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण बैठक में बीएचयू के विभिन्न संस्थान, आईसीएआर, निजी क्षेत्र, एनजीओ और अन्य प्रमुख हितधारकों के लगभग 40 प्रतिनिधि शामिल हुए।
पूर्व आईएएस अधिकारी नीलकमल दरबारी ने किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तकनीक-आधारित, किसान-केन्द्रित और बाजार-केन्द्रित रणनीतियों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने एग्रीबिजनेस पार्क और तकनीकी हब के माध्यम से किसानों, उद्योगों, एफपीओ तथा एनजीओ के बीच समन्वय स्थापित करने की सलाह दी।
आईआईटी बीएचयू (IIT BHU) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि तकनीक तभी सफल होगी जब वह किसानों की वास्तविक समस्याओं के अनुरूप हो। उन्होंने धान, सब्जी और फल की वैल्यू चेन मजबूत करने और सभी हितधारकों की जवाबदेही सुनिश्चित करने पर बल दिया।
आइसार्क के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने उत्पादकता के बजाय किसानों की लाभप्रदता पर फोकस करने की आवश्यकता जताई और क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार व्यावहारिक नवाचारों के विकास पर जोर दिया।
बैठक में सुझाव दिए गए कि एग्रीपार्क को लैंडस्केप के माध्यम से विकसित किया जाए, इंटरक्रॉपिंग को बढ़ावा मिले और शुरुआत में 4-5 प्रमुख फसलों पर ध्यान केंद्रित करते हुए धीरे-धीरे अन्य फसलों को भी शामिल किया जाए।
सत्र का समापन इस सहमति के साथ हुआ कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के एग्रीटेक क्षेत्र की क्षमता बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचा, डिजिटल नवाचार, संस्थागत समर्थन और उद्यमिता विकास को मिलाकर एक ठोस प्रस्ताव विकसित किया जाएगा।
