चन्दौली
बाबा जागेश्वर नाथ धाम के ऐतिहासिक मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब
शिकारगंज (चंदौली)। चंद्रप्रभा नदी के पावन तट पर स्थित हेतिमपुर की तपोभूमि में अवस्थित प्राचीन बाबा जागेश्वर नाथ धाम में महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर आयोजित दो दिवसीय ऐतिहासिक मेले का शुभारंभ रविवार को भोर से ही श्रद्धा और उत्साह के साथ हुआ। सुबह होते ही दूर-दराज़ से आए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर परिसर में उमड़ पड़ी। पूरा वातावरण ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा, जिससे क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब गया।
मंदिर के महंत अनूप गिरी ने बताया कि यह मेला वर्षों पुरानी परंपरा का प्रतीक है। जो क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है। महाशिवरात्रि के पावन दिन विशेष रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और रात्रि जागरण का आयोजन किया गया। श्रद्धालु जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। सुबह से ही मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। जिनमें महिलाएं, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग सभी शामिल रहे।

मेले में श्रद्धा के साथ-साथ मनोरंजन का भी भरपूर प्रबंध किया गया है। बच्चों और युवाओं के आकर्षण का केंद्र इलेक्ट्रॉनिक हवाई झूला बना हुआ है। इसके अलावा छोटे बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार के झूले, खेल-तमाशे और आकर्षक सजावटी स्टॉल लगाए गए हैं। स्थानीय हस्तशिल्प, खिलौने, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, मिठाइयों और खानपान की दुकानों पर भी भीड़ देखी जा रही है। ग्रामीण परिवेश में सजे इस मेले ने क्षेत्र की सांस्कृतिक छटा को और भी जीवंत बना दिया है।
सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र थाना प्रभारी अर्जुन सिंह पुलिस बल के साथ लगातार चक्रमण करते नजर आए। मेले में लगे सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से भी निगरानी की जा रही है। प्रशासन द्वारा स्वच्छता और यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
ऐतिहासिक मेले में श्रद्धा, भक्ति और मनोरंजन का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। चंद्रप्रभा तट पर सजी आस्था की यह भव्य तस्वीर क्षेत्र की धार्मिक एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का जीवंत उदाहरण बन गई है।वही भक्तो ने बाटी,चोखा व चुरमा बनाकर प्रसाद के रूप मे ग्रहण किया नवयुवती व नवयुवक मिले परिसर भर में से ऐतिहासिक पल को यादगार बनाया।
