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वाराणसी

बाबा के दरबार को कॉरपोरेट मॉडल बनाने की कोशिश : राघवेन्द्र चौबे

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‘दर्शन ऐप से नहीं, श्रद्धा से होते हैं’—राघवेन्द्र चौबे का तीखा हमला

वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में एक मई से लागू की जा रही ऐप आधारित व्यवस्था को लेकर कांग्रेस पार्टी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। महानगर कांग्रेस कमेटी, वाराणसी के अध्यक्ष राघवेन्द्र चौबे ने इस निर्णय को आस्था पर प्रहार बताते हुए कहा कि बाबा विश्वनाथ के दरबार को व्यापारिक मॉडल में बदलने की कोशिश की जा रही है, जिसे काशी की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।

राघवेन्द्र चौबे ने कहा कि विश्व की प्राचीनतम जीवंत नगरी काशी, जहां हर गली में शिव का वास माना जाता है और जहां सदियों से संत, महात्मा, विद्वान, तपस्वी तथा करोड़ों श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के चरणों में शीश नवाते आए हैं, वहां अब आस्था को प्रशासनिक आदेशों और डिजिटल व्यवस्थाओं में सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इसे काशी की आत्मा पर हमला करार देते हुए मंदिर प्रशासन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और एसडीएम को इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने कहा कि काशी केवल एक शहर नहीं, बल्कि सनातन सभ्यता की चेतना है, जहां मोक्ष की कामना लेकर लोग आते हैं और बाबा विश्वनाथ के दर्शन को जीवन धन्य मानते हैं। ऐसे स्थल पर दर्शन व्यवस्था को मोबाइल ऐप, पासवर्ड और तकनीकी प्रक्रियाओं पर आधारित करना परंपराओं के विपरीत है। उनके अनुसार, यहां सदियों से श्रद्धा, विश्वास और सरलता ही प्रवेश का माध्यम रही है, लेकिन वर्तमान प्रशासन बाबा के दरबार को कॉरपोरेट मॉडल पर चलाने की कोशिश कर रहा है।

चौबे ने आरोप लगाया कि मंदिर प्रशासन के अधिकारी अपनी सीमाएं लांघ रहे हैं और स्वयं को दरबार का नियंत्रक समझकर निर्णय ले रहे हैं। उन्होंने इसे निंदनीय बताते हुए कहा कि ऐप आधारित व्यवस्था गरीबों, किसानों, मजदूरों, बुजुर्गों, महिलाओं, ग्रामीण श्रद्धालुओं और तकनीकी संसाधनों से दूर लोगों के साथ अन्याय है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब दर्शन का अधिकार इंटरनेट और डिजिटल पंजीकरण पर निर्भर करेगा।

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उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर परिसर और धाम क्षेत्र में लगातार बाजारीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है, जहां व्यवस्थाओं को कमाई और नियंत्रण का साधन बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, श्रद्धालुओं को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है, स्थानीय लोग परेशान होते हैं और बुजुर्गों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जबकि प्रशासन का ध्यान केवल वीआईपी संस्कृति और दिखावे पर केंद्रित है।

राघवेन्द्र चौबे ने कहा कि काशी के मूल निवासियों को बाबा से दूर करने की कोशिश लंबे समय से की जा रही है। जो लोग पीढ़ियों से नियमित दर्शन करते आए हैं, उनके लिए अब समय सीमाएं और प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। उन्होंने इसे काशी की आत्मा को कमजोर करने का प्रयास बताया और कहा कि मंदिर प्रशासन सरकार को खुश करने के लिए मनमाने फैसले ले रहा है।

उन्होंने मांग की कि मुख्य कार्यपालक अधिकारी और एसडीएम मंदिर प्रशासन इस निर्णय पर तत्काल जवाब दें कि बिना संवाद और सहमति के यह व्यवस्था क्यों लागू की गई। साथ ही जिन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के आरोप हैं, उन्हें जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाए। उन्होंने काशीवासियों के लिए निर्धारित दर्शन द्वारों की समय सीमा बढ़ाने, स्थानीय नागरिकों के लिए सहज प्रवेश सुनिश्चित करने और पूर्व की तरह सरल व्यवस्था बहाल करने की मांग की।

चौबे ने कहा कि बाबा के दरबार में प्रवेश का अधिकार सभी भक्तों को समान रूप से मिलना चाहिए, न कि ऐप या प्रशासनिक अनुमति के आधार पर। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया तो कांग्रेस पार्टी, काशीवासी, संत समाज और श्रद्धालु व्यापक जनआंदोलन करने को बाध्य होंगे और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि काशी की पहचान उसकी आध्यात्मिक गरिमा, सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपरा, घंटों की ध्वनि, गंगा आरती और बाबा विश्वनाथ की कृपा से है, जिसे प्रशासनिक दबाव या तकनीकी व्यवस्था से नहीं चलाया जा सकता। कांग्रेस पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह काशी की आस्था, संस्कृति और जनाधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी और बाबा विश्वनाथ के दरबार को किसी भी प्रकार के वाणिज्यिक या प्रशासनिक दबाव का केंद्र नहीं बनने देगी।

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