वाराणसी
पुलिस पर जानलेवा हमले में चार अभियुक्तों को कोर्ट ने सुनाई सजा
वाराणसी। पुलिस टीम पर जानलेवा फायरिंग के एक पुराने मामले में करीब 13 वर्ष बाद अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अपर जिला जज (पंचम) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने चार अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को सात-सात वर्ष के कारावास और 10-10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। दोषियों में अमित सिंह उर्फ सोनू, धीरज पाल, सन्नी सोनकर और विशाल शामिल हैं।
अदालत ने अवैध असलहा बरामदगी के मामले में भी चारों को दोषी मानते हुए दो-दो वर्ष के अतिरिक्त कारावास तथा तीन-तीन हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी ओंकार नाथ तिवारी और विनय कुमार सिंह ने प्रभावी पैरवी की, जिसके आधार पर अदालत ने यह निर्णय दिया।
अभियोजन के अनुसार, 12 नवंबर 2013 को तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (अपराध) कमलेश दीक्षित अपनी टीम के साथ लहरतारा ओवरब्रिज पर वांछित एवं इनामी अपराधियों की तलाश में चेकिंग अभियान चला रहे थे। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि मंडुवाडीह की ओर से तीन बाइकों पर कुछ संदिग्ध बदमाश आ रहे हैं, जो लूट और चोरी की घटनाओं में शामिल हैं। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन घिरते देख बदमाश बाइक छोड़कर भागने लगे और पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
फायरिंग के दौरान एक गोली पुलिस अधीक्षक कमलेश दीक्षित की बुलेटप्रूफ जैकेट के बाईं ओर लगी, जिससे वे सुरक्षित बच गए। इसके बाद पुलिस ने पीछा कर छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उनके पास से अवैध असलहे व कारतूस बरामद किए।
जांच के उपरांत पुलिस ने चार अभियुक्तों के साथ अरुण उर्फ नखड़ू और अजय यादव के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान अरुण उर्फ नखड़ू और अजय यादव ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया, जिसके चलते उनकी पत्रावली अलग कर दी गई। उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने चारों अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। अदालत के इस निर्णय को पुलिस पर हमले जैसे गंभीर मामलों में कड़ा संदेश माना जा रहा है।
