गोरखपुर
बर्खास्त शिक्षिका को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, सवेतन बहाली का आदेश
गोरखपुर। विकास खण्ड भटहट अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय डुमरी में तैनात सहायक अध्यापिका प्रीति जायसवाल को सेवा समाप्ति के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। न्यायालय ने अपने आदेश दिनांक 20 अप्रैल 2026 में सेवा समाप्ति को निरस्त करते हुए शिक्षिका को तत्काल प्रभाव से सवेतन बहाल करने तथा सेवा समाप्ति की अवधि का समस्त वेतन भुगतान करने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया है।
गौरतलब है कि बीएसए (जिला बेसिक शिक्षा प्राधिकरण) द्वारा 28 जुलाई 2025 को प्रीति जायसवाल की सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। आरोप था कि उनके खिलाफ कुछ अनियमितताओं एवं तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की गई। इसके बाद शिक्षिका ने इस कार्रवाई को गलत और एकपक्षीय बताते हुए उच्च न्यायालय की शरण ली और न्याय की गुहार लगाई।
मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपने-अपने तर्क न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई तथ्यों के विपरीत एवं प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई है। वहीं, प्रतिवादी पक्ष ने अपने निर्णय को उचित ठहराने का प्रयास किया। सभी तथ्यों एवं अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने पाया कि सेवा समाप्ति की कार्रवाई में पर्याप्त आधार एवं विधिक प्रक्रिया का अभाव था, जिसके चलते उक्त आदेश को निरस्त कर दिया गया।
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि शिक्षिका को तत्काल कार्यभार ग्रहण कराया जाए और जिस अवधि में वे सेवा से बाहर रहीं, उस पूरी अवधि का वेतन भी भुगतान किया जाए। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों को आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में शिक्षिका के खिलाफ कथित रूप से कुछ लोगों द्वारा सुनियोजित तरीके से शिकायतें कर कार्रवाई कराई गई थी। यहां तक कि स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई के बाद कुछ लोगों द्वारा जश्न मनाने की भी चर्चाएं रहीं। हालांकि, न्यायालय के फैसले के बाद अब वही पक्ष बैकफुट पर नजर आ रहा है और विभागीय हलकों में इस आदेश को लेकर खासी हलचल देखी जा रही है।
बताया जा रहा है कि इस मामले में कुछ बाहरी तत्वों एवं विभागीय कर्मियों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं रही हैं, जिन पर शिक्षिका को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन न्यायालय के निर्णय ने पूरे प्रकरण की दिशा बदल दी है।
पीड़ित शिक्षिका प्रीति जायसवाल ने न्यायालय के आदेश की प्रति वीएसए गोरखपुर को प्रेषित करते हुए शीघ्र कार्यभार ग्रहण कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने यह भी अपेक्षा जताई है कि आदेश का समयबद्ध तरीके से अनुपालन किया जाएगा।
इस फैसले के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। जहां पहले सेवा समाप्ति को लेकर एक पक्ष में उत्साह का माहौल था, वहीं अब न्यायालय के निर्णय के बाद वही लोग मायूस नजर आ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
फिलहाल, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग उच्च न्यायालय के आदेश का पालन कितनी शीघ्रता से करता है और शिक्षिका को कब तक पुनः कार्यभार ग्रहण कराया जाता है तथा बकाया वेतन का भुगतान किया जाता है।
