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वाराणसी

गंगा नदी में बाढ़ काल के दौरान वरुणा नदी में बैक फ्लो होता है, जो लगभग दो माह तक रहता है-अधि0अभि0, बंधी प्रखंड

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जिसके कारण ड्रेनेज सिस्टम अवरूद्ध हो जाता है व आईसी चैम्बर, मिनी चैम्बर एवं मेनहोल क्षतिग्रस्त एवं चोक हो जाते है

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   वाराणसी। "वरूणा नदी चैनेलाइजेशन एवं तटीय विकास परियोजना के अन्तर्गत बैंक, रेलिंग, आईसी चैम्बर लाइटिंग एवं पाथवे इंटरलाकिंग के कार्य कार्यदायी संस्था द्वारा वर्ष 2018 में पूर्ण कराया गया था। उक्त संरचना को पूर्णतया विकसित कर वरूणा नदी में मिलने वाले 13 नालों को टैपकर चौकाघाट मुख्य सीवेज पम्पिंग स्टेशन में मिलाया गया है, जिसके द्वारा सीवेज पम्प कर दीनापुर एसटीपी मे शोधन हेतु भेजा जाता है।    
  उक्त के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए अधिशासी अभियंता बंधी प्रखंड राजेश यादव ने बताया कि दीनापुर एसटीपी मे शोधन कार्य वर्तमान में भी यह क्रियाशील है। प्रत्येक वर्ष गंगा नदी में बाढ़ काल के दौरान वरुणा नदी में बैक फ्लो होता है, जो लगभग दो माह तक रहता है जिसके कारण ड्रेनेज सिस्टम अवरूद्ध हो जाता है एवं आईसी चैम्बर, मिनी चैम्बर एवं मेनहोल क्षतिग्रस्त एवं चोक हो जाते है। जिसके अनुरक्षण का कार्य प्रत्येक वर्ष कराया जाना अति आवश्यक होता है। उन्होंने बताया कि परियोजना नगर निगम को हस्तान्तरित की जानी है, परन्तु अभी तक परियोजना हस्तान्तरित नहीं हो पाई है। सिंचाई विभाग के पास उक्त परियोजना के अनुरक्षण कार्य हेतु कोई धनावंटन नही है । वार्षिक अनुरक्षण कार्य हेतु एक नार्मल प्राक्कलन लागत रू0 395.95 लाख मात्र का उच्चाधिकारियों को स्वीकृति हेतु प्रेषित किया गया है। जिसकी स्वीकृति के उपरांत धनावंटन प्राप्त होने पर अनुरक्षण कार्य कराया जायेगा। उन्होंने बताया कि वरूणा कॉरिडोर की

साफ-सफाई एवं बायें किनारे के पाथवे की मरम्मत का कार्य कराया जा चुका है। नक्खी घाट पर रैम्प का निर्माण वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा कराया जा रहा है।

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