Connect with us

गाजीपुर

मनिहारी बीईओ पर जांच रिपोर्ट में हेराफेरी का आरोप

Published

on

Loading...
Loading...

बच्चों की फर्जी उपस्थिति से लेकर मिड डे मील तक गड़बड़ी, जांच रिपोर्ट पर उठे सवाल

मनिहारी (गाजीपुर) जयदेश। जिले के विकासखंड मनिहारी के खंड शिक्षा अधिकारी हेमंत कुमार पर विद्यालय जांच रिपोर्ट में हेराफेरी करने का आरोप लगाया गया है। वहीं, खंड शिक्षा अधिकारी मनिहारी हेमंत कुमार कई वर्षों से मनिहारी खंड में तैनात हैं।

गाजीपुर जिले के विकासखंड मनिहारी के खंड शिक्षा अधिकारी हेमंत कुमार पर विद्यालय जांच के नाम पर रिपोर्ट में हेराफेरी करने का आरोप है। प्राप्त साक्ष्यों के अनुसार मामला वर्ष 2025 का बताया गया है। विद्यालय की शिकायत मिलने पर एक पत्रकार प्राथमिक विद्यालय सरायकुबरा, क्षेत्र मनिहारी पहुंचा था, जहां के प्रधानाध्यापक, प्रधानाध्यापक पुत्र तथा विद्यालय के सहायक अध्यापक सुभाष यादव पर पत्रकार के साथ हाथापाई और दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा। इसकी शिकायत पत्रकार ने खंड शिक्षा अधिकारी मनिहारी हेमंत कुमार से की थी।

आरोप है कि हेमंत कुमार इस मामले को कई महीनों तक दबाए रहे। जब पत्रकार ने उनसे पूछा कि मामले में क्या कार्रवाई की गई, तो उन्होंने गोलमोल जवाब देना शुरू कर दिया। इसके बाद पत्रकार ने तत्कालीन बीएसए हेमंत राव से शिकायत की। तब हेमंत राव ने प्राथमिक विद्यालय सरायकुबरा, क्षेत्र मनिहारी की जांच खंड शिक्षा अधिकारी मनिहारी हेमंत कुमार को सौंप दी। जांच मिलने के बाद भी हेमंत कुमार मामले को लटकाते रहे। इसी दौरान तत्कालीन जिला बेसिक अधिकारी हेमंत राव का तबादला हो गया और नई जिला बेसिक अधिकारी उपासना रानी वर्मा ने कार्यभार संभाला। इसके बावजूद खंड शिक्षा अधिकारी मनिहारी हेमंत कुमार ने विद्यालय की कोई जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की। बाद में पत्रकार ने नई जिला बेसिक अधिकारी उपासना रानी वर्मा से संपर्क किया, जिस पर उन्होंने रिमाइंडर देने को कहा और आश्वासन दिया कि वह मामले को देखेंगी।

रिमाइंडर मिलने के बाद उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारी मनिहारी को तत्काल रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए, लेकिन इसके बाद भी रिपोर्ट प्रेषित नहीं की गई। पुनः पत्रकार द्वारा कहने पर 9 सितंबर 2025 को प्राथमिक विद्यालय सराय कुबरा की जांच पत्रकार की मौजूदगी में खंड शिक्षा अधिकारी मनिहारी द्वारा की गई। जांच के दौरान कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। आरोप है कि जो बच्चे विद्यालय में कभी नहीं आते थे, उनकी भी उपस्थिति दर्ज की जाती थी। मिड डे मील में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाकर दर्ज की गई थी। 9 सितंबर 2025 को दोपहर बाद मिड डे मील रजिस्टर भी नहीं भरा गया था। वहां यह भी प्रमाण मिला कि पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट जैसा व्यवहार किया गया था।

Advertisement

जांच में यह भी सामने आया कि वहां के प्रधानाचार्य कार्य करने में अक्षम हैं, जिसके कारण उनके कार्य विद्यालय के सहायक अध्यापक सुभाष यादव द्वारा किए जाते हैं। आरोप है कि सुभाष यादव दस्तावेज तैयार करने में स्वयं हेराफेरी करते हैं और उन्हें इस बात की चिंता नहीं रहती कि वह फंसेंगे। उन्हें यह लगता है कि कागजों में हेराफेरी होने पर प्रधानाध्यापक फंसेंगे और वह स्वयं बच जाएंगे। सबसे अधिक आश्चर्य की बात यह रही कि विद्यालय के अध्यापकों को यह तक जानकारी नहीं थी कि कौन सा छात्र किस कक्षा में पढ़ता है। किसी छात्र को बुलाकर पूछने पर अध्यापक बताते थे कि वह कक्षा एक का छात्र है, लेकिन जब कक्षा एक का रजिस्टर मंगाकर देखा जाता था तो उस छात्र का नाम उसमें नहीं मिलता था। इसके बाद अध्यापक उसे कक्षा दो का छात्र बताते थे, लेकिन कक्षा दो के रजिस्टर में भी उसका नाम नहीं मिलता था। इसी प्रकार कक्षा तीन और चार तक अध्यापक बताते रहे, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा था कि छात्र किस कक्षा में पढ़ते हैं।

ऐसा प्रतीत हुआ कि अध्यापकों को पहले ही जांच की भनक लग गई थी और विद्यालय में बच्चों की संख्या अधिक दिखाने के लिए बाहर से बच्चों को बुलाकर बैठाया गया था। सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2025 से पहले विद्यालय में मिड डे मील के नाम पर बड़े स्तर पर खेल किया गया। जांच के बाद दो-चार महीने तक विद्यालय की व्यवस्थाएं ठीक रहीं, लेकिन बाद में विद्यालय फिर पुरानी स्थिति में पहुंच गया।

अब रही बात सच्चाई की, तो पत्रकार और खंड शिक्षा अधिकारी मनिहारी हेमंत कुमार के बीच बातचीत का एक ऑडियो वायरल होने की बात कही जा रही है। इसमें पत्रकार उनसे कहते सुनाई दे रहे हैं कि जो बातें जांच में सही पाई गई हैं, उन्हें रिपोर्ट में भी सही-सही दर्ज किया जाए। इस पर हेमंत कुमार कथित तौर पर यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि रिपोर्ट सही बनाई जाएगी। बातचीत में वह यह भी स्वीकार करते बताए जा रहे हैं कि पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार हुआ और बच्चे विद्यालय नहीं आए थे।

हालांकि आरोप है कि जब रिपोर्ट लगाने की बारी आई तो खंड शिक्षा अधिकारी मनिहारी ने पूरी रिपोर्ट ही बदल दी, जिससे अध्यापकों और अधिकारियों को भ्रष्टाचार करने का अवसर मिलता रहे। सवाल उठाया गया है कि जब जिले में इस प्रकार के अधिकारी रहेंगे तो भ्रष्टाचार पर लगाम कैसे लगेगी, जबकि योगी सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति की बात करती है। आरोप है कि खंड शिक्षा अधिकारी मनिहारी हेमंत कुमार जैसे अधिकारी सरकार की इस नीति को कमजोर करने में लगे हुए हैं।

Advertisement

Copyright © 2024 Jaidesh News. Created By Hoodaa

You cannot copy content of this page