वाराणसी
बीएचयू को मिला सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय का पुरस्कार
छात्रों को मिलेंगी ये सुविधाएं
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) को राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति और भारतीय अंतरिक्ष नीति को सफलतापूर्वक लागू करने तथा जागरूकता बढ़ाने में योगदान के लिए सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय का पुरस्कार मिला है। इस सम्मान के तहत बीएचयू ने आईआईटी-बॉम्बे के फोस्सी (फ्री एंड ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर फॉर एजुकेशन) और जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) की पहलों में सक्रिय भागीदारी निभाई है।
डॉ. प्रशांत कुमार श्रीवास्तव को मिला राष्ट्रीय भू-स्थानिक फेलो अवार्ड

बीएचयू के पर्यावरण और सतत विकास संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत कुमार श्रीवास्तव को राष्ट्रीय भू-स्थानिक संकाय फेलो पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस साल देशभर से केवल छह वैज्ञानिकों को यह पुरस्कार मिला है, जिसमें डॉ. प्रशांत सबसे युवा हैं।
छात्रों के लिए नई संभावनाएं
बीएचयू को यह पुरस्कार मिलने के बाद विश्वविद्यालय के विज्ञान और तकनीकी छात्रों के लिए नई शोध और प्रशिक्षण की संभावनाएं खुल गई हैं। छात्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंटर्नशिप और फेलोशिप का अवसर मिलेगा। इसके अलावा, आईआईटी-बॉम्बे के समर और विंटर स्कूलों में शोध कार्य करने का मौका भी मिलेगा।
भू-स्थानिक तकनीक की उपयोगिता
डॉ. प्रशांत ने बताया कि भू-स्थानिक तकनीक के माध्यम से क्षेत्र विशेष का सटीक और रियल-टाइम डेटा प्राप्त किया जा सकता है। इस तकनीक की मदद से लैंडस्लाइड, सूखा, और बाढ़ जैसी आपदाओं की पहचान आसान हो जाती है। यह तकनीक आपदा प्रबंधन और योजना निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
छात्रों को मिलेंगी ये सुविधाएं
राष्ट्रीय भू-स्थानिक इंटर्नशिप: 2025 से छात्रों को देश के किसी भी संस्थान में यह अवसर मिलेगा।
शोध का मौका: आईआईटी-बॉम्बे में समर और विंटर स्कूल में शोध करने का अवसर।
फेलोशिप: छात्रों को राष्ट्रीय भू-स्थानिक अनुसंधान फेलोशिप का लाभ।
सम्मेलन में भागीदारी: राष्ट्रीय जीआईएस उद्योग-अकादमिक सम्मेलन में हिस्सा लेने का मौका।
ज्ञान साझेदारी: फोस्सी जीआईएस की गतिविधियों में शामिल होने का अवसर।
इस उपलब्धि ने बीएचयू को शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। विश्वविद्यालय अब सरकारी एजेंसियों और प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ मिलकर काम करेगा।
