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प्रधानमंत्री मोदी ने जनजातीय विरासत को दिलाया वैश्विक सम्मान
15 नवंबर को मनाया जाएगा जनजातीय गौरव दिवस
नई दिल्ली। 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस मनाने जा रहा है, जो भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिन और उनकी अमर विरासत को समर्पित है। यह दिन जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक धरोहर और योगदान को भी सम्मानित करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय संस्कृति और विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता दी गई है।
भगवान बिरसा मुंडा की विरासत का सम्मान
प्रधानमंत्री मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा के योगदान को रेखांकित करने के लिए 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया। झारखंड के उलिहातु में बिरसा मुंडा के जन्मस्थान का दौरा करने वाले वह पहले प्रधानमंत्री हैं। रांची में बिरसा मुंडा मेमोरियल पार्क और स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय भी इस दिशा में उनकी पहल का हिस्सा हैं।
जनजातीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर पहचान
प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न वैश्विक नेताओं को भारत की जनजातीय कलाकृतियाँ भेंट कर आदिवासी कला को सम्मान दिलाया। डोकरा कला, सोहराई पेंटिंग, गोंड कला और वारली पेंटिंग जैसी कलाओं को उन्होंने विश्व मंच पर प्रस्तुत किया।
भौगोलिक संकेत (GI) टैग से पहचान बढ़ी
सरकार ने 75 से अधिक जनजातीय उत्पादों को जीआई टैग प्रदान कर उनकी मान्यता बढ़ाई है। इनमें असम की जापी टोपी, ओडिशा की डोंगरिया कोंध शॉल और अरुणाचली याक चुरपी शामिल हैं। इसके अलावा, 300 से अधिक जनजातीय विरासत संरक्षण केंद्र भी स्थापित किए गए हैं।
जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मान
मोदी सरकार ने बिरसा मुंडा, रानी कमलापति और वीर दुर्गावती जैसे महान जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों को विशेष सम्मान दिया। हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति रेलवे स्टेशन और कैमाई स्टेशन का नाम रानी गाइदिन्ल्यू के नाम पर रखा गया।
आदि महोत्सव: जनजातीय संस्कृति का उत्सव
2017 से आयोजित हो रहे आदि महोत्सव ने जनजातीय कारीगरों और उनकी कला को व्यापक मंच प्रदान किया है। 1,000 से अधिक कारीगरों ने इस आयोजन में भाग लिया, जिससे उनके उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।
जनजातीय उत्पादों का वैश्विक निर्यात
अराकू कॉफी, छत्तीसगढ़ के महुआ फूल, शॉल, पेंटिंग और अन्य हस्तशिल्प उत्पाद अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों में लोकप्रिय हो रहे हैं। ट्राइफेड आउटलेट्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से इन उत्पादों की बिक्री को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
ट्राइफेड: आजीविका का सशक्तिकरण
ट्राइफेड ने 2,18,500 से अधिक कारीगर परिवारों को सशक्त बनाया है और 1,00,000 से अधिक जनजातीय उत्पादों की बिक्री की सुविधा प्रदान की है।
