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अयोध्या में दीपोत्सव में जले दीयों से तेल की लूट
कुछ लोगों ने कहा- ‘160 रुपए लीटर नहीं खरीद सकते तेल, इससे ही मनाएंगे दिवाली’
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में दीपोत्सव के तहत सरयू नदी के 55 घाटों पर 28 लाख दीये जलाए गए। हालांकि, जैसे ही दीये बुझाए गए, घाटों पर एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। गरीब तबके के लोग बुझे हुए दीयों से सरसों के तेल को इकट्ठा करने लगे।
‘तेल खरीदना हमारी पहुंच से बाहर’
तेल इकठ्ठा कर रहे लोगों का कहना है कि उनकी गरीबी उन्हें ऐसा करने पर मजबूर कर रही है। सरसों का तेल मार्केट में 160 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है, जिसे खरीद पाना उनके लिए संभव नहीं। ऐसे में वे इन बुझे दीयों से तेल इकट्ठा कर दिवाली मनाने का साधन जुटा रहे हैं।
घाटों पर दिखी अलग ही तस्वीर
दीयों के बुझते ही घाटों पर तेल इकट्ठा करने के लिए लोग डिब्बे और बोतलें लेकर पहुंच गए। वहां महिलाएं, बच्चे, युवक और बुजुर्ग तेजी से दीयों का तेल बटोर रहे थे। तेल लेने की जल्दबाजी में लोगों पर पुलिस का भी डर था, इसलिए सब जल्द से जल्द तेल भरने में जुटे थे।

लोगों ने क्या कहा ?
घाट पर तेल इकट्ठा करने आये राम लाल प्रसाद ने कहा, “हम दीपोत्सव के दौरान हर साल आते हैं ताकि ज्यादा तेल ले सकें। यह समय हमारे लिए सौभाग्य लाता है। इस तेल को महीने भर चलाने की कोशिश करते हैं।”
बहराइच जिले से आयी मीना नाम की एक महिला ने कहा कि, “हम चार दिन पहले से ही अयोध्या में रुके हैं। गांव के 50 लोग साथ में आए हैं और सभी रामघाट स्टेशन के पास रुके हुए हैं। यहां से चार-पांच लीटर तेल इकट्ठा कर लेंगे, जो कई दिनों तक चलेगा।”
अयोध्या के ही रहने वाले रामू नाम के एक शख्स ने कहा कि,”महंगाई के कारण हमें मजदूरी भी नहीं मिल रही है। त्योहार के समय हमारे पास कुछ भी नहीं बचा है।” जबकि रघुवीर नामक एक व्यक्ति ने कहा, “इस तेल को पहले हम गर्म करेंगे, ताकि इसे खाना पकाने में भी उपयोग कर सकें।”
दीपोत्सव की भव्यता और तेल की जरूरत
अयोध्या के दीपोत्सव के लिए 28 लाख दीयों में 91 हजार लीटर सरसों का तेल भरा गया, हर दीये में लगभग 30 मि.ली. तेल डाला गया। हालांकि, यह आयोजन जितना भव्य रहा, वहीं आसपास के गरीब तबके के लिए ये बुझे दीये तेल जुटाने का एक अवसर बन गए जो महंगाई के इस दौर में दिवाली के लिए एक उम्मीद है।
