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वाराणसी

बायो- फोर्टिफाइड फसलें कुपोषण दूर करने में सहायक

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वाराणसी (मिर्जामुराद)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली में  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विभिन्न जलवायु क्षेत्र के लिए उपयुक्त 65 फसलों की 109 प्रजातियां को राष्ट्र के किसानों को समर्पित किया गया। इस कार्यक्रम के तहत कृषि विज्ञान केंद्र कल्लीपुर द्वारा एक जागरूकता गोष्ठी एवं कार्यक्रम के सजीव प्रसारण का आयोजन किया गया जिसमें जनपद के दर्जनों प्रगतिशील कृषकों ने प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. श्री‌प्रकाश सिंह ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित एवं माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा राष्ट्र को समर्पित 109 किस्में किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी होगी। इनमें कुछ किस्में जैव संवर्धित है जो कुपोषण को दूर करने में अत्यंत सहायक होंगी।

उन्होंने बताया किबायो- फोर्टिफिकेशन एक वैज्ञानिक पद्धति है, जिसमें जैव प्रौद्योगिकी का प्रयोग करके आयरन, विटामिन, जिंक आदि पोषक तत्वों को मूल फसलें उगाते समय ही उनमें जोड़ दिया जाता है, जो मिट्टी से अधिक मात्रा में आयरन और जिंक जैसे अन्य आवश्यक खनिज ग्रहण कर सकें। वर्ष 2012 में पहली बायो- फोर्टिफाइड बाजरे की किस्म ‘धनशक्ति’ का उत्पादन और वितरण शुरू किया गया।

केंद्र के प्रसार वैज्ञानिक डॉक्टर राहुल सिंह ने बताया कि बाजरे की यह किस्म बच्चों में आयरन की आवश्यकता को शत-प्रतिशत पूरी करने में सक्षम है। वैसे विभिन्न फसलों की जैव संवर्धित किस्मों पर कृषि विज्ञान केंद्र, वाराणसी द्वारा प्रदर्शन भी कराए गए हैं ।शस्य वैज्ञानिक डॉ अमितेश ने बताया कि कृषि उपज बढ़ने के साथ-साथ आज लोगों के सामने ‘छिपी हुई भूख’ यानी कुपोषण से लड़ने की चुनौती भी खड़ी है। कैलोरी, प्रोटीन और वसा जैसे पोषक तत्वों की प्रति व्यक्ति उपलब्धता के मामले में हम पीछे है। ऐसे में, बायो -फोर्टिफाइड खाद्यान्न की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

केंद्र के उद्यान वैज्ञानिक डॉ मनीष पाण्डेय ने बताया कि राष्ट्र को समर्पित उन्नत किस्मों के प्रयोग से किसानों को अधिक से अधिक लाभ होगा।बाजरे के अतिरिक्त चावल, गेहूं, दलहन, तिलहन, फल और सब्जियों की 17 बायो -फर्टिफाइड किस्में विकसित हो जाने से खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ पोषण-सुरक्षा भी सुनिश्चित होगा।

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प्रक्षेत्र प्रबंधक राणा पियूष सिंह द्वारा किसानों को प्रक्षेत्र पर लगे धान की विभिन्न प्रजातियों की कैफेटेरिया एवं प्रदर्शन इकाइयों का भ्रमण भी कराया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में देवमणि, कमलेश सिंह का योगदान सराहनीय रहा।

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