Connect with us

पूर्वांचल

मनरेगा के पैसों से मजदूरों का नहीं, बड़े बाबूओं का हो रहा विकास

Published

on

Loading...
Loading...

चंदौली। भारत सरकार के महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा जो मजदूरों के आर्थिक विकास के लिए चलायी गयी। लेकिन उस योजना से मजदूरों का विकास हो या न हो लेकिन साहब का विकास इस कदर हुआ कि वह अपने बाल के साथ साथ मूँछ को भी काला करने लगे। इसके पीछे मानक के विपरीत मनरेगा से पक्के कार्य के नाम पर बजट भेजने में मिलने वाला अतिरिक्त कमीशन है।

सूत्रों की माने तो सकलडीहा विकास खण्ड के कम्हारी, इटवां, सलेमपुर, डेढगावां, बरहवानी, नागेपुर, बर्थरा जैसे गांव में मानक की धज्जियां उड़ाते हुए धन आवंटित किया गया है। इन पैसों के हिसाब-किताब को घुमा फिरा कर प्रस्तुत किया जा सकता है।खेती पर आश्रित किसान जितनी मेहनत से धान पैदा करते है। लेकिन उतने ही आसानी से यहां आने वाले कुछ भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारी कार्य कर लेते है जो एक नजीर बन कर रह जाती है।

Loading...

सकलडीहा विकास विकास खण्ड का एक ऐसा गांव है। जहां साहब के जाति विशेष का ग्राम प्रधान है। जो साहब के रिश्तेदारों की सूची में शामिल हो गया है। उक्त गांव के साथ साथ अन्य आधा दर्जन गांव को अतिरिक्त कमीशन पर मानक को ताक पर रख पक्का कार्य के लिए आईडी दिलायी गयी।

सूत्रों की माने तो उक्त धनराशि के लिए विभागीय कमीशन के अलावा 3% अतिरिक्त धन साहब को दिया जाता है। मनरेगा के तहत 60/ 40 के रेसियो से कार्य होता है। मतलब बजट का 60% भाग मजदूरी पर तथा 40% भाग सामग्री पर खर्च करना होता है। इसी अनुपात पर पक्का कार्य के लिए आईडी जनरेट होती है। लेकिन कुछ ऐसे ग्राम पंचायतों को मनरेगा में लाभ देने के लिए शामिल किए गए है। जहां मानक को दर किनार कर। अपने दोनों हाथ से समेटने वाली मानक को रखा गया। जिसका लाभ ऐसे गांव सभा को मिला जहाँ से जुड़े जनप्रतिनिधि आसानी से लिफाफे में रखकर धन को ला सकते है, बल्कि विशेष कृपा मिलने पर बकायदे उनके एजेंट के रूप में धन उपलब्ध करा देते है।

Copyright © 2024 Jaidesh News. Created By Hoodaa

You cannot copy content of this page