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धर्म-कर्म

काशी कोतवाल भैरव उत्सव में मगंलवार को होगा दिव्य चमत्कारिक शक्तिपात

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बरसेगा धन ,सुख संपदा, आरोग्य का मिलेगा आशीर्वाद, भक्तों की जेब–पर्स में प्राप्त होगा सिंदूर, कुमकुम, इलाइची, लोंग, पुष्प व अनेक कृपा प्रसाद पदार्थ

रिपोर्ट – प्रदीप कुमार

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वाराणसी। इस धरा की पौराणिक आध्यात्मिक दैवीय नगरी काशी में श्री कृष्णगिरी शक्तिपीठाधीपति, राष्ट्रसंत, सर्व धर्म दिवाकर, वचन सिद्ध पूज्यश्री वसंतविजयजी महाराज साहेब के दिव्य तप, साधना का चमत्कार मंगलवार, 15 नवंबर को एक बार फिर से अलौकिक शक्तिपात के रूप में विविध मंत्रो की तरंगों से इनके श्रीमुखारविंद से बरसेगा। काशी के नरिया, सुंदरपुर स्थित रामनाथ चौधरी शोध संस्थान में मंगलवार दोपहर 2 बजे से श्री भैरव महाकथा के दौरान मंत्र शिरोमणि पूज्यश्री वसंतविजयजी महाराज साहेब ब्रह्माण्डीय ऊर्जा की विविध तरंगों को दुर्लभ बीज मंत्रों के साथ वैश्विक स्तर पर प्रवाहित कर लोगों को आरोग्य के साथ–साथ कर्ज मुक्ति व संपदा का अति दिव्य आशीर्वाद प्रदान करेंगे। इस दौरान हजारों, लाखों लोगों की जेब में अथवा पर्स में धन, कुमकुम, सिंदूर, इलाइची, लोंग व पुष्प इत्यादि अनेक सामग्री प्रकट कर देवीकृपा का चमत्कार निश्चित अनुभव होगा। आयोजन का सीधा प्रसारण पूज्यश्रीजी के अधिकृत वेरीफाइड यूट्यूब चैनल थॉट योगा पर भी लाइव प्रसारण के दौरान सभी दर्शकों को भी लाभान्वित करेगा। रविवार को पूज्यश्री की निश्रा में पूजा, जप, साधना, आराधना के क्रम में भैरव भक्ति के पांचवें दिन शाम को हवन यज्ञ में आहुतियां दी गई। इससे पूर्व श्रीभैरव महाकथा में अपने अमृतमयी प्रवचन में साधना के शिखर पुरुष पूज्यश्री वसंतविजयजी महाराजा बोले कि भगवान की भक्ति में विधि नहीं, विधि का ज्ञान फलित करता है इसलिए विधि के विवेक को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भक्ति को स्वीकार करने से ही कल्याण संभव है। रविवार को पंचमी तिथि बुधादित्य योग को राजयोग कारक बताते हुए काशी वासियों सहित देश और दुनिया भर से आए हजारों श्रद्धालुओं के रोग मुक्त एवं ऋणमुक्ति हेतु दुर्लभ शक्तियुक्त सूर्य देव का मंत्र स्तुति वाचन भी किया। उन्होंने कहा कि ईश्वर की प्राप्ति अथवा प्रसाद–फल गुरु कृपा से ही संभव है। व्यक्ति की योग्यता अथवा हलकट स्वभाव उसे ईश्वर से दूर रखता है। उन्होंने कहा कि किसी भी वस्तु का हाथ लगना महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि उसका उपयोग किस प्रकार से हो रहा है यह अति महत्वपूर्ण है। मय उदाहरण के प्रसंग वश उन्होंने लक्ष्य निर्धारित कर जीवन जीने की सीख देते हुए कहा कि हर वस्तु में, धातु में भी भावना होती है यह विज्ञान ने सिद्ध किया है। उपयोग में की जाने वाली हर वस्तु से प्रेम भावना रखेंगे तो निश्चित ही अति दिव्य भावनाएं प्रकट होगी। इस ब्रह्मांड में जो भी जड़ चेतन्य वस्तु है उनसे प्रेम प्रदर्शित करेंगे तो प्रेम की तरंग पदार्थ से भावना से जुड़कर श्रेष्ठता का सहयोग करके आगे बढ़ाएगी। इस अवसर पर आध्यात्म योगीराज, साधना के शिखर पुरुष संतश्री वसंतविजयजी महाराज साहेब ने अपने आगामी वर्ष 2023 के मई–जून माह में गंगोत्री में ग्रीष्म काल में धर्म, आध्यात्म, भक्ति के महामहोत्सव की घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि गंगोत्री के इस आयोजन में आगंतुक सभी श्रद्धालु उनके सान्निध्य में परमात्मा की भक्ति में शक्ति का साक्षात अनुभव कर सकेंगे। काशी कोतवाल भैरव उत्सव में रविवार को रात्रि के सत्र में विराट हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा, हरिओम पवार, अरुण जेमिनी, शशिकांत यादव, शंभू शिखर, गौरव शर्मा सरीखे अनेक कवियों ने अपनी हास्य एवं वीर रस की विविध रचनाओं से उपस्थित बड़ी संख्या में श्रोताओं को तालियों की गूंज हंसी से लोटपोट कराते हुए देश प्रेम से सराबोर किया। आयोजन का सीधा प्रसारण पूज्यश्री के अधिकृत वेरीफाइड यू ट्यूब चैनल थॉट योगा पर लाइव प्रसारित किया जा रहा है।

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