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वाराणसी

भगवान का नाम लेने से पापियों का भी कल्याण होता है: पार्वती नन्दन महाराज

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रिपोर्ट – प्रदीप कुमार

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वाराणसी। जाफराबाद में चल रही श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिन पार्वती नन्दन महाराज ने बताया कि पाप तीन तरह से होता है। हाथ से करने से आख से देखने से और कान से सुनने से अजामिल पंडित जी विद्वान थे, परिपित भाषित थे। यशस्वी मनस्वी थे, अजामिल पंडित जी को शास्त्रों का बोध था। शास्त्रों का ज्ञान था। एक दिन नित्य कर्म से निवृत्त होकर लौट रहे थे तो किसी गणिका को देख और उनके मन में पाप समाहित हुआ। उस गणिका को जाकर के बोले मेरे पास अनन्त सम्पत्ति है। गणिका को तो धन चाहिये और अजामिल पंडित गणिका के साथ गन्धर्व विवाह करके घर ले आये। घर में प्रवेश करते ही बोली ये कौन हैं। अजमिल बोला ये मेरी पत्नी हैं। गणिका बोली यदि ये यहां रहेगी तो मै नहीं रह सकती। गणिका के सौन्दर्य पर इतना मोहित हो गया कि अपनी परम सुशीला पत्नी को त्याग दिया।
प्रातः जैसे ही भजन करने बैठा गणिका डाटकर बोली, क्या माला पूजा लेकर बैठ गये। जाओ धन कमाकर लाओ। अजामिल चोरी करने लगा, डाका डालने लगा। माथे पर काला पट्टी बांधकर नंगी तलवार हाथ में लेकर जब निकलता लोग अपनी दूकान बन्द कर लेते लोगों के मन में बहुत भय था। अयोध्या से संत वृंदावन जा रहे थे रात्रि विश्राम वहीं हुआ और अजामिल से दक्षिणा मांग की कि जो पुत्र होने वाला है उसका नाम नारायण रख देना। अजामिल की मृत्यु का समय आया यमराज ने अपने दूतों को अजामिल को लाने को भेजा, यमराज के दूतों का विकराल रूप देखकर अजामिल डर गया। चिल्लाने लगा, बचोओ बचाओ। थोड़ी दूर पर उसका बेटा खेल रहा था। उस पर नजर पड़े ही चिल्लाया बेटा नारायण बचाओ नारायण का नाम उच्चारण हुआ वहां भगवान के दिव्य पषिद पहुंच गये यमदूतों से छुडाये। यमदूत बोले आप इसे क्यों रोकते हैं ये तो बड़ा ही पापी है। परमात्मा के पार्षदों ने कहा ये कैसा भी क्यों न हो इसने मेरे प्रभु को भजा है। दोनों लौट कर चले गये अजामिल सोचा एक बार नारायण की महीमा ये है तो हमेशा जपूंगा तो क्या होगा। अजामिल घर छोड़कर तपस्या करने जंगल में चला गया और भगवान के धाम को गया। इस अवसर पर मुख्य यजमान कृष्ण कान्त सपरिवार उपस्थित रहे।

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