धर्म-कर्म
लोक आराधना के महापर्व डाला छठ पर भगवान भास्कर को दूध और जल का दिया गया पहला अर्घ्य, उमड़ी श्रदालुओं की भीड़
रिपोर्ट – मनोकामना सिंह
वाराणसी। लोक आराधना के महापर्व डाला छठ के तीसरे दिन (सूर्य षष्ठी) पर रविवार को लाखों व्रती महिलाओं के साथ उनके परिजनों ने पूरे आस्था के साथ गंगा किनारे विभिन्न घाटों,वरूणा तट,बरेका स्थित सूर्य सरोवर,कुंड ,सरोवरों पर अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को दूध और जल का पहला अर्घ्य दिया । साफ—सफाई और शुद्धता से बने विविध पकवानों और मौसमी फलों से सजे सूप के आगे से अर्घ्य देकर व्रतियों ने भगवान सूर्य और छठी मइया से परिवार में श्री समृद्धि,वंश वृद्धि,संतति की लम्बी उम्र की कामना की। इस दौरान गंगा घाटों पर छठी मइया का परम्परागत गीत ‘सेविले चरन तोहार हे छठी मइया, कांचे ही बांस के बहंगिया, मरबो रे सुगवा धनुष से सुगा गिरे मुरझाय, कईली बरतिया तोहार हे छठी मैया, दर्शन दीहीं हे आदित देव, कौन दिन उगी छई हे दीनानाथ की गूंज रही। अर्घ्य देने के बाद व्रती महिलाएं छठी मइया का गीत गाते डाल व सूप लेकर घर लौटते समय कलश में जलता हुआ दीपक हाथ में लेकर लौटी। सड़क पर भीड़ के धक्के से दीपक को बचाने के लिए परिवार के अन्य सदस्य उस दीपक के चारों ओर घेरा बना कर चल रहे थे।
