गाजीपुर
जिला अस्पताल में सुरक्षाकर्मी पर अभद्रता का आरोप, डीएम से कार्रवाई की मांग
रेडियोलॉजी विभाग में मरीजों और बुजुर्गों से दुर्व्यवहार का आरोप, बिना नेम प्लेट ड्यूटी करने पर भी उठे सवाल
गाजीपुर (गोराबाजार)। राजकीय जिला अस्पताल सह मेडिकल कॉलेज, गोराबाजार के रेडियोलॉजी विभाग में तैनात एक सुरक्षाकर्मी के व्यवहार को लेकर मरीजों और तीमारदारों में नाराजगी की बात सामने आई है। आरोप है कि एक्स-रे और एमआरआई जांच कराने आने वाले मरीजों, बुजुर्गों और उनके परिजनों के साथ सुरक्षाकर्मी अभद्र व्यवहार करता है। इससे दूर-दराज से इलाज कराने आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शिकायत के अनुसार, अस्पताल परिसर में वरिष्ठ नागरिकों और गंभीर मरीजों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद संबंधित सुरक्षाकर्मी पर इन निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप है। बताया गया है कि जब बुजुर्ग या अन्य मरीज प्राथमिकता देने की बात कहते हैं, तो उन्हें कथित तौर पर कड़े लहजे में जवाब दिया जाता है और लाइन में लगने को कहा जाता है। इस व्यवहार को लेकर मरीजों और तीमारदारों ने नाराजगी जताई है।
पुराने कर्मचारियों ने भी जताई नाराजगी
अस्पताल के कुछ पुराने कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नए सुरक्षाकर्मियों के व्यवहार से उन्हें भी परेशानी होती है। उनका आरोप है कि सुरक्षाकर्मी मरीजों के साथ-साथ अस्पताल के पुराने कर्मचारियों से भी ठीक ढंग से पेश नहीं आते। कर्मचारियों के अनुसार, शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
बिना नेम प्लेट ड्यूटी करने पर सवाल
रेडियोलॉजी विभाग में तैनात संबंधित सुरक्षाकर्मी के बिना नेम प्लेट ड्यूटी करने का भी आरोप लगाया गया है। इससे उसकी पहचान करने और शिकायत दर्ज कराने में परेशानी होने की बात कही गई है। मामले में अस्पताल प्रशासन से सुरक्षाकर्मियों की पहचान, ड्यूटी व्यवस्था और मरीजों के साथ उनके व्यवहार की जांच कराने की मांग की गई है।
डीएम से औचक निरीक्षण की मांग
इस मामले को लेकर जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला से जिला अस्पताल सह मेडिकल कॉलेज का औचक निरीक्षण कराने की मांग की गई है। साथ ही मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आनंद मिश्रा और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की गई है।
मांग की गई है कि वरिष्ठ नागरिकों और गंभीर मरीजों के लिए निर्धारित प्राथमिकता व्यवस्था का प्रभावी ढंग से पालन कराया जाए। अस्पताल में आने वाले प्रत्येक मरीज के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित हो तथा ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों की पहचान स्पष्ट रहे। संबंधित सुरक्षाकर्मी पर लगे आरोपों की जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि मरीजों को इलाज के लिए अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।
