वाराणसी
थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए निगेटिव ब्लड ग्रुप का बढ़ा संकट
वाराणसी। थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों का जीवन बनाए रखने के लिए उन्हें नियमित रूप से रक्त चढ़ाना आवश्यक होता है। जिले में बीएचयू अस्पताल, मंडलीय अस्पताल, आईएमए ब्लड बैंक समेत अन्य ब्लड बैंकों को मिलाकर हर महीने लगभग 500 बच्चों के लिए खून की आवश्यकता पड़ती है। पॉजिटिव ब्लड ग्रुप किसी तरह उपलब्ध हो जाता है, लेकिन निगेटिव ब्लड ग्रुप की भारी कमी बनी हुई है।
वर्तमान में करीब 20 ऐसे बच्चे हैं, जिनका ब्लड ग्रुप ए और बी निगेटिव है। एक ओर निगेटिव ब्लड ग्रुप काफी दुर्लभ होता है, वहीं गर्मी के मौसम में रक्तदान भी कम हो जाता है। ऐसे में निगेटिव ग्रुप का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना बड़ी चुनौती बना हुआ है। थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के इलाज को लेकर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 8 मई को थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है। बीएचयू (BHU) बाल रोग विभाग की प्रो. विनीता गुप्ता ने बताया कि बीएचयू अस्पताल के ब्लड बैंक में वाराणसी समेत आसपास के जिलों और बिहार आदि क्षेत्रों के करीब 350 बच्चे पंजीकृत हैं।

बाल रोग विभाग में संचालित थैलेसीमिया यूनिट में समय-समय पर बच्चों को उनके अभिभावक इलाज के लिए लेकर पहुंचते हैं। इसके अतिरिक्त मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा, दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल और आईएमए ब्लड बैंक को मिलाकर भी लगभग 200 बच्चे पंजीकृत हैं।
थैलेसीमिया से प्रभावित कुल 500 बच्चों में 150 से अधिक ऐसे बच्चे हैं, जिन्हें बेहतर जीवन के लिए हर सप्ताह रक्त बदलना पड़ता है। करीब 200 बच्चों को 15 दिन के अंतराल पर, जबकि अन्य बच्चों को आवश्यकता के अनुसार महीने में एक बार रक्त चढ़ाया जाता है। आईएमए के सचिव डॉ. एके त्रिपाठी ने बताया कि ब्लड बैंक के नियमों के अनुसार इस बीमारी से पीड़ित बच्चों को बिना डोनेशन और बिना किसी शुल्क के खून उपलब्ध कराया जाता है।
बच्चों के लिए रिजर्व रखना पड़ता है स्टॉक
मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा ब्लड बैंक में तैनात जितेंद्र पटेल ने बताया कि औसतन लगभग 40 थैलेसीमिया (Thalassemia) पीड़ित बच्चों को रक्त उपलब्ध कराया जाता है। पॉजिटिव ब्लड ग्रुप किसी तरह मिल जाता है, लेकिन निगेटिव ग्रुप को लेकर अक्सर समस्या बनी रहती है। बच्चों का इलाज प्रभावित न हो, इसलिए उनके लिए ब्लड का स्टॉक रिजर्व रखना पड़ता है।
आईएमएस बीएचयू (IMS BHU) के निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने बताया कि थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के उपचार के लिए ब्लड बैंक में अलग-अलग ब्लड ग्रुप का पर्याप्त स्टॉक होना जरूरी है। यह तभी संभव है जब लोग स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आएंगे। खासकर निगेटिव ब्लड ग्रुप वाले लोगों को रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए, ताकि बच्चों का इलाज सुचारु रूप से चलता रहे।
