वाराणसी
काशी विश्वनाथ मंदिर में लगी ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’, अब नक्षत्र-मुहूर्त की मिलेगी सटीक जानकारी
वाराणसी। काशी विश्वनाथ मंदिर के चौक क्षेत्र में अब श्रद्धालु केवल बाबा विश्वनाथ के दर्शन ही नहीं करेंगे, बल्कि भारत की प्राचीन और वैज्ञानिक काल गणना पद्धति का भी साक्षात अनुभव कर सकेंगे। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से यहां विश्व प्रसिद्ध ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ स्थापित कर राष्ट्र को समर्पित किया गया है। उज्जैन के बाद वाराणसी देश का दूसरा प्रमुख धार्मिक स्थल बन गया है, जहां इस तरह की अनूठी घड़ी लगाई गई है।
यह विशेष घड़ी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से भेंट की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लगभग 700 किलोग्राम वजनी इस घड़ी को बाबा विश्वनाथ के चरणों में समर्पित किया। यह पहल ‘सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य’ के आयोजन के अवसर पर की गई, जिसका उद्देश्य सम्राट विक्रमादित्य की गौरवगाथा को जन-जन तक पहुंचाना है।
लखनऊ की संस्था ‘आरोहण’ के आरोह श्रीवास्तव द्वारा तैयार इस वैदिक घड़ी में पारंपरिक समय गणना को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ा गया है। इसमें 24 घंटों को 30 मुहूर्त (घटी) में विभाजित किया गया है, जिनमें प्रत्येक का अपना धार्मिक महत्व और नाम है। घड़ी में सामान्य घंटे, मिनट और सेकेंड की सुइयों के साथ-साथ सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर समय की गणना की व्यवस्था भी है। इसके माध्यम से मुहूर्त, पंचांग, मौसम संबंधी जानकारी सहित कई ज्योतिषीय विवरण प्राप्त किए जा सकेंगे।
वैदिक समय प्रणाली को समझने के लिए आधुनिक समय मानकों का उल्लेख भी आवश्यक है। ब्रिटिश शासनकाल में भारत में दो समय क्षेत्र कोलकाता और मुंबई प्रचलित थे, जिन्हें बाद में एकीकृत कर भारतीय मानक समय (IST) लागू किया गया। यह ग्रीनविच के ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) से 5 घंटे 30 मिनट आगे है। GMT को वर्ष 1884 में वैश्विक समय मानक के रूप में मान्यता दी गई थी और 1972 तक यह अंतरराष्ट्रीय नागरिक समय का आधार बना रहा।
यह घड़ी स्थान विशेष के सूर्योदय के अनुसार संचालित होती है, जिससे स्थानीय काल गणना अधिक सटीक हो जाती है। इसके साथ ही इसमें वैदिक समय, भारतीय मानक समय, GMT, तापमान, वायु गति, आर्द्रता, पंचांग, विक्रम संवत मास, ग्रहों की स्थिति, योग, भद्रा, चंद्र स्थिति, व्रत-त्योहार, शुभ-अशुभ मुहूर्त, चौघड़िया, सूर्य एवं चंद्र ग्रहण सहित अनेक खगोलीय और धार्मिक जानकारियां भी उपलब्ध होंगी।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उज्जैन को ‘समय गणना’ की नगरी और काशी को ‘पंचांग’ की नगरी माना जाता है। इन दोनों का संगम भारत की प्राचीन वैज्ञानिक परंपरा को वैश्विक स्तर पर पुनर्स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि इस वैदिक घड़ी के माध्यम से नई पीढ़ी को भारत की उन्नत समय गणना प्रणाली से परिचित कराया जा सकेगा, जो केवल घंटे और मिनट तक सीमित न होकर नक्षत्रों और सूक्ष्म कालखंडों तक विस्तृत है।
