गोरखपुर
एमएमएमयूटी में साइबर फॉरेंसिक्स पर एक सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू
गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग द्वारा साइंट टेक्नोलॉजीज, नई दिल्ली के सहयोग से “साइबर फॉरेंसिक टूल्स फॉर साइबर इन्वेस्टिगेशन एंड एविडेंस एनालिसिस” विषय पर एक सप्ताह का अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रम सोमवार को प्रातः 11:30 बजे आर्यभट्ट हॉल में प्रारंभ हुआ।
कार्यक्रम का आयोजन कुलपति प्रो. जे. पी. सैनी के नेतृत्व एवं विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार के सहयोग से किया जा रहा है। यह पहल विश्वविद्यालय में एडवांस्ड साइबर फॉरेंसिक्स एवं वेलनेस रिसर्च लैब की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में कुलपति प्रो. जे. पी. सैनी ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक के दौर में छात्रों के कौशल विकास के लिए उद्योग आधारित प्रयोगशालाएं आवश्यक हैं, जिससे उन्हें रोजगार, शोध एवं नवाचार के बेहतर अवसर मिल सकें।
विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि बढ़ते साइबर अपराध जैसे डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ठगी, सोशल मीडिया फ्रॉड, साइबर स्टॉकिंग और पहचान चोरी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि साइबर फॉरेंसिक्स डिजिटल साक्ष्यों के माध्यम से अपराधियों की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. बी. के. शर्मा एवं डॉ. विमल कुमार कर रहे हैं। डॉ. विमल कुमार ने कार्यक्रम का परिचय देते हुए बताया कि प्रशिक्षण में मोबाइल, कंप्यूटर एवं नेटवर्क फॉरेंसिक्स, मल्टीमीडिया विश्लेषण, ड्रोन एवं वीडियो फॉरेंसिक्स, वॉयस एनालिटिक्स, स्टेगनोग्राफी तथा पासवर्ड क्रैकिंग जैसी तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
विशेष अतिथि हेमंत बगासी, जनरल मैनेजर, साइंट टेक्नोलॉजीज, नई दिल्ली ने कहा कि छात्रों के लिए व्यावहारिक ज्ञान अत्यंत आवश्यक है और ऐसे कार्यक्रम उद्योग एवं शिक्षा के बीच की दूरी को कम करने में सहायक होते हैं। कार्यक्रम में लगभग 45 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है। रिसोर्स पर्सन मणि भारती प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। इस अवसर पर कुलपति प्रो. जे. पी. सैनी, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार सी.पी. प्रियदर्शी, विशेष अतिथि हेमंत बगासी, संकाय सदस्य, शोधार्थी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन डॉ. बी. के. शर्मा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
