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गोरखपुर

किशोर न्याय एवं बाल संरक्षण पर आयोजित हुआ एकदिवसीय जोनल प्रशिक्षण कार्यक्रम

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डीजीपी उत्तर प्रदेश ने वर्चुअल माध्यम से किया संबोधन, एडीजी गोरखपुर जोन मुथा अशोक जैन रहे मुख्य अतिथि

गोरखपुर। किशोर न्याय अधिनियम के तहत बालकों की देखरेख एवं संरक्षण को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से गोरखपुर स्थित सर्किट हाउस के समीप बाबा गंभीर नाथ प्रेक्षागृह में एकदिवसीय जोनल स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) द्वारा गूगल मीट के माध्यम से संबोधित किया गया, जबकि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गोरखपुर जोन के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) मुथा अशोक जैन रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ एडीजी मुथा अशोक जैन द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज तेजी से बदल रहा है और हम 21वीं सदी में प्रवेश कर चुके हैं, ऐसे में पुलिस एवं सुरक्षा एजेंसियों को भी समय के अनुरूप अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव लाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का प्रभाव बच्चों और किशोरों के व्यवहार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जिसका असर अपराध की प्रकृति और पुलिस के दैनिक कार्यों में भी देखने को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि आज मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों की सोच और व्यवहार को प्रभावित कर रहे हैं। कई मामलों में बच्चे घर छोड़कर दूसरे शहरों की ओर चले जाते हैं, जिससे परिवार और प्रशासन दोनों के सामने गंभीर चुनौतियां उत्पन्न हो जाती हैं। ऐसी परिस्थितियों में पुलिस, एसएसबी, जीआरपी, आरपीएफ तथा सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय अत्यंत आवश्यक है।

एडीजी ने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम एक ऐसा मंच है जहां बच्चों से जुड़े सभी विभाग एवं एजेंसियां मिलकर विचार-विमर्श कर सकती हैं। भारत युवा देश है और आज के बच्चे ही आने वाले वर्षों में देश का भविष्य तय करेंगे, इसलिए उनके साथ संवेदनशील व्यवहार और उचित मार्गदर्शन बेहद जरूरी है।

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उन्होंने जेजे एक्ट (Juvenile Justice Act) और पॉक्सो एक्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून का उद्देश्य बच्चों को दंडित करना नहीं बल्कि उनका संरक्षण करना अधिक महत्वपूर्ण है। कई मामलों में पीड़ित और आरोपी दोनों ही बच्चे होते हैं, इसलिए पुलिस को कानून के साथ संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए कार्य करना चाहिए।

एडीजी अशोक जैन ने सभी अधिकारियों से खुलकर प्रश्न पूछने और प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ लेने का आह्वान किया। उन्होंने सुझाव दिया कि जोन स्तर पर पुलिस, जीआरपी और आरपीएफ का संयुक्त व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जाए, जिसमें सभी जनपदों के थाना प्रभारी भी जुड़े रहें, ताकि बच्चों से संबंधित मामलों में त्वरित सूचना एवं समन्वय स्थापित किया जा सके।

उन्होंने कहा कि अक्सर घर से निकले बच्चे दूसरे जिलों या राज्यों में पहुंच जाते हैं, ऐसे में अंतरजनपदीय समन्वय अत्यंत आवश्यक हो जाता है। आपसी सहयोग और सूचना साझा करने की व्यवस्था मजबूत होने से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

इस अवसर पर डीआईजी एस. चन्नप्पा, जिलाधिकारी दीपक मीणा, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ, एसपी सिटी अभिनव त्यागी, एसपी नॉर्थ ज्ञानेंद्र , एसपी साउथ दिनेश पुरी, अपर पुलिस अधीक्षक दिनेश गोदारा सहित गोरखपुर जोन के विभिन्न जनपदों से आए पुलिस अधिकारी, सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधि एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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