वाराणसी
दो कर्मयोगियों मोदी-योगी ने बदल दी काशी की तस्वीरः सी.पी. राधाकृष्णन
उत्तर-दक्षिण संगम का प्रतीक बनी काशी, उपराष्ट्रपति ने किया धर्मशाला का लोकार्पण
वाराणसी। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में श्री काशी नाटकोट्टाई संस्था द्वारा निर्मित 60 करोड़ रुपये की लागत से तैयार नए धर्मशाला भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने काशी को उत्तर और दक्षिण भारत के संगम का अद्भुत उदाहरण बताया और कहा कि यह शहर सदियों से भक्ति, ज्ञान और संस्कृति का केंद्र रहा है।


उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के लोग केवल भक्ति के लिए नहीं, बल्कि ज्ञान प्राप्त करने के उद्देश्य से भी काशी आते रहे हैं। महाकवि सुब्रह्मण्य भारती जैसे संतों ने यहां रहकर जीवन को काशी की आध्यात्मिकता से जोड़ा।


उपराष्ट्रपति ने 62,000 वर्गफीट भूमि की पुनर्प्राप्ति का उल्लेख करते हुए धर्मशाला के निर्माण को “धर्म की जीत” बताया। उन्होंने कहा कि धर्म पर संकट अस्थायी होता है, स्थायी नहीं। वर्ष 2022 में योगी सरकार के आदेश पर कमिश्नरेट पुलिस ने इस जमीन को कब्जे से मुक्त कराया था। उसी भूमि पर अब 10 मंजिला, 140 कमरों वाली यह धर्मशाला खड़ी है।

उन्होंने कहा कि 25 वर्ष पूर्व जब वे काशी आए थे और गंगा स्नान किया था, तब उनके जीवन में ऐसा परिवर्तन हुआ कि उन्होंने सदा के लिए शाकाहार अपना लिया। 2014 में चुनाव के समय की काशी और आज की काशी में “जमीन-आसमान का अंतर” बताते हुए उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे दो कर्मयोगियों की वजह से संभव हुआ है।

राधाकृष्णन ने कहा कि जहां नाटकोट्टाई समूह कार्यरत होता है, वहां प्रगति और धर्म साथ-साथ चलते हैं। यह समूह सेवा, त्याग और दूसरों के लिए जीने का प्रतीक है। 1863 में तमिलनाडु से काशी आने वाले भक्तों की सुविधा के लिए इसकी स्थापना हुई थी, और आज भी वही भावना जीवित है। उन्होंने बताया कि इस भवन में 76 सोलर लैंप लगाए गए हैं, जिनकी लागत 1.5 करोड़ रुपये है, जिससे हर वर्ष 25 लाख रुपये की ऊर्जा बचत होगी।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत आज विश्व का सबसे आकर्षक निवेश केंद्र है और उत्तर प्रदेश देश में सबसे आगे है। उन्होंने कहा कि गंगा से कावेरी तक एक ही आत्मा प्रवाहित हो रही है। भगवान राम ने रामेश्वरम में ज्योतिर्लिंग की स्थापना की और आदि शंकराचार्य ने इसी संगम को आत्मबोध के रूप में आगे बढ़ाया।
उपराष्ट्रपति ने श्री काशी विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा के दर्शन-पूजन भी किए। उन्होंने देवी अन्नपूर्णा की उस मूर्ति की वापसी का उल्लेख किया, जिसे एक सदी पहले चुराया गया था और जो प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से कनाडा से भारत वापस लाई गई। उन्होंने कहा कि आज काशी हर ओर “हर हर महादेव” और “गंगा मैया की जय” के जयघोष से गूंज रही है। यह काशी के आध्यात्मिक पुनर्जागरण का प्रतीक है।
