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गोरखपुर

भगवती भूवनेश्वरी देवी धाम और मां कोटही दरबार की अद्भुत महिमा

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गोरखपुर। दक्षिणांचल के खजनी क्षेत्र में स्थित भगवती भूवनेश्वरी देवी धाम सेमरडाडी और प्रख्यात सिद्ध शक्तिपीठ मां कोटही दरबार भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु माता की आराधना कर मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं।

सेमरडाडी में विराजमान मां भूवनेश्वरी का धाम अलौकिक शक्ति का प्रतीक है, जहां भक्त अपनी व्यथा सुनकर हल्के मन और नई ऊर्जा के साथ लौटते हैं। ग्रामीण अंचल से लेकर नगर तक लोग नवरात्रि, पूजन पर्व या साधारण दिनों में भी दर्शन के लिए आते हैं।

आस्था से किए गए संकल्प पूरे होते हैं, चाहे वह संतान प्राप्ति की मनोकामना हो, व्यापार में उन्नति की आशा हो या रोग-व्याधि से मुक्ति की कामना, भक्त विश्वास के साथ धाम में आते हैं और लौटते समय मां की कृपा का अनुभव करते हैं। खजनी का मां कोटही दरबार दूर-दूर तक प्रसिद्ध सिद्ध पीठ है। यहां का वातावरण भक्तिभाव से ओतप्रोत रहता है और नवरात्रि के दिनों में इसकी महिमा और भी बढ़ जाती है।

भक्तजन अपनी पीड़ा सुनाकर मानसिक शांति पाते हैं और पूजा-अर्चना में लीन होकर हृदय को अद्भुत शांति का अनुभव करते हैं। दोनों धामों में भक्त अपनी-अपनी श्रद्धा और भक्ति के साथ नारियल चढ़ाते, चुनरी अर्पित करते और धूप-दीप से माता को प्रसन्न करते हैं। साधारण दिन हो या त्योहार, भक्तों का आना-जाना निरंतर बना रहता है और मां की कृपा से उनके जीवन की बाधाएं स्वतः दूर हो जाती हैं।

नवरात्र में विशाल आयोजन होते हैं, भजन-कीर्तन और अखंड ज्योति से पूरा वातावरण आध्यात्मिक रंग में रंग जाता है और माता के जयकारे चारों ओर गूंजते हैं। सेमरडाडी और कोटही दरबार का महत्व धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी है, यहां आने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपने मन को हल्का और आत्मा को शांत अनुभव करता है। लोकमान्यता है कि इन धामों में साधना और ध्यान करने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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भारतभूमि में शक्ति उपासना का विशेष महत्व है और गोरखपुर दक्षिणांचल के इन धामों में शक्ति की उपासना का अद्भुत संगम दिखाई देता है। यहां भक्त नवरात्र में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं, दुर्गा सप्तशती के पाठ, सप्तचंडी यज्ञ और अखंड कीर्तन से पूरा वातावरण दिव्य बन जाता है।

भक्त मानते हैं कि माता के दर्शन मात्र से उनके हृदय में असीम भक्ति उमड़ पड़ती है और मां के चरणों में बैठकर उन्हें ऐसा लगता है मानो सारी परेशानियां स्वतः समाप्त हो गई हों।

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