वाराणसी
BHU : नई तकनीक से होगी मूत्राशय कैंसर की शुरुआती पहचान
वाराणसी। बीएचयू के विज्ञान संस्थान के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के शोधकर्ताओं ने चिकित्सा विज्ञान संस्थान के यूरोलॉजी विभाग के सहयोग से मूत्राशय कैंसर (यूबीसी) की शुरुआती पहचान के लिए नई मूत्र आधारित तकनीक विकसित की है।
यह अध्ययन स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के डॉ. समरेन्द्र कुमार सिंह तथा यूरोलॉजी विभाग, आईएमएस के डॉ. ललित कुमार के नेतृत्व में डॉ. गरिमा सिंह, डॉ. अनिल कुमार, सृष्टी भट्टाचार्जी समेत शोध दल द्वारा किया गया। यह शोध अंतरराष्ट्रीय पत्रिका नेचर स्प्रिंगर समूह की बीएमसी यूरोलॉजी में प्रकाशित हुआ है।
शोधकर्ताओं ने बताया कि मूत्र में मौजूद एक्सोसोमल माइक्रोआरएनए कैंसर की पहचान के लिए अत्यंत स्थिर और भरोसेमंद बायोमार्कर के रूप में कार्य करते हैं। यह नई तकनीक वर्तमान जांच विधियों की सीमाओं को दूर करती है, जहां सिस्टोस्कोपी आक्रामक होती है और यूरिन साइटोलॉजी की संवेदनशीलता कम रहती है।
शोध में तीन माइक्रोआरएनए के संयोजन (पैनल) ने 90 प्रतिशत से अधिक संवेदनशीलता प्रदर्शित की, जो इसे मूत्राशय कैंसर के लिए प्रभावी गैर आक्रामक निदान उपकरण बनने की दिशा में संभावनाशील बनाता है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि बायोमार्कर कैंसर के विभिन्न चरणों के अनुसार अलग-अलग स्तर पर मौजूद रहते हैं। डॉ. समरेन्द्र कुमार सिंह के अनुसार, यह अध्ययन कैंसर निदान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम है।
