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मिर्ज़ापुर

“पुस्तक को समझने के लिए चाहिए विश्लेषण दृष्टि” : प्रो. शिशिर पाण्डेय

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चित्रकूट विश्वविद्यालय के कुलपति ने किया पुस्तक का लोकार्पण, विद्वानों को किया सम्मानित

मीरजापुर। चित्रकूट स्थित जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिशिर पाण्डेय ने कहा कि किसी भी पुस्तक को गहराई से समझने के लिए विश्लेषण की दृष्टि आवश्यक है। रचनाकार अपने भावों को सूत्र वाक्यों में पिरोता है, जिनका व्यापक अर्थ होता है।

प्रो. पाण्डेय ने यह बात रविवार, 12 जनवरी को मीरजापुर के महर्षि दयानंद बालिका इंटर कॉलेज के सभागार में आयोजित एक समारोह में कही। इस अवसर पर कॉलेज की प्रिंसिपल एवं साहित्यकार डॉ. उषा कनक पाठक की पुस्तक “द्वैताद्वैत का अनुपम संसार” का लोकार्पण किया गया। कुलपति ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि यह कृति साधारण पाठकों और गहन अध्ययन करने वालों, दोनों के लिए उपयोगी है। उन्होंने इसे सुगम और अगम दोनों बताया।

विशिष्ट अतिथि डॉ. सच्चिदानंद पाठक ने कहा कि पुस्तक में द्वैत और अद्वैत के विचारों को गहराई से प्रस्तुत किया गया है। समारोह की अध्यक्षता श्रीमाता प्रसाद माताभीख इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. श्यामनारायण तिवारी ने की।

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समारोह में पुस्तक की समीक्षा सलिल पाण्डेय ने प्रस्तुत की। लोकगीत गायन विजय शंकर पाठक ने किया, जबकि सरस्वती वंदना जवाहरलाल दुबे ने की। कार्यक्रम का संचालन सेवा निवृत्त शिक्षक उमाशंकर पाण्डेय ने किया और धन्यवाद ज्ञापन इंजीनियर सौरभ पाठक ने दिया।

समापन अवसर पर पुस्तक के प्रकाशक अमित आनंद ने आयोजन की सराहना की। समारोह में शिक्षा और पत्रकारिता जगत के विशिष्ट व्यक्तियों को उत्तरीय पहनाकर सम्मानित किया गया।

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