पूर्वांचल
जौनपुर : दागदारों की जमात में कम दाग़दार को चुनने की चुनौती
कृपाशंकर पर आय से अधिक संपति तो बाबू सिंह पर एनआरएचएम घोटाले का आरोप
जौनपुर लोकसभा के मतदाता इस बार अजीब द्वन्द में फँसे हैं। इसकी वजह है चुनाव मैदान में उतरे दो प्रमुख दलों के प्रत्याशियों का लेखा जोखा। एक तरफ़ बीजेपी की तरफ़ से कृपाशंकर सिंह हैं तो दूसरी तरफ़ इंडिया गठबंधन से बाबू सिंह कुशवाहा। दाग़दार दामन में कोई किसी से कम नहीं है। लेकिन इस मुक़ाबले में एक तीसरा कोण भी है। बसपा ने बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला रेड्डी को अपना प्रत्याशी बनाया है। जानकारी के तौर पर बता दें कि, धनंजय सिंह सजायफ़्ता हैं और जौनपुर जेल में सजा काट रहे हैं।
सबसे पहले कृपाशंकर सिंह की बात करते हैं। इनके ऊपर आय से अधिक क़रीब 300 करोड़ की संपत्ति अवैध तरीक़े से अर्जित करने का आरोप है। यह अलग बात है की स्वीकृति न मिलने की वजह से उनपर अब तक मुक़दमा नहीं चल सका। वे सत्तर के दशक में जौनपुर से मुंबई गये थे। जीविकोपार्जन के लिए इन्होंने पटरी पर सब्ज़ी तक बेची। धीरे-धीरे इन्होंने उत्तर भारतीयों में अपनी पैठ बनानी शुरू की। इनकी प्रतिभा को पहचान कर कांग्रेस ने इन्हें विधानसभा का टिकट दिया। पहले ये विधायक बनें फिर महाराष्ट्र के गृहराज्य मंत्री तक का सफ़र तय किया। कहा जाता है कि, जिस दौरान ये गृहराज्य मंत्री थे उस समय मुंबई में अंडरवर्ल्ड का काफ़ी बोलबाला था। कृपाशंकर सिंह ने मुंबई से अंडरवर्ल्ड के सफ़ाये में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कुछ साल पहले इन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया और अब जौनपुर से बीजेपी उम्मीदवार हैं।

बाबू सिंह कुशवाहा के राजनीतिक सफ़र पर नज़र डालेंगें तो पायेंगे कि, मायावती शासन काल में ये काफ़ी क़द्दावर मंत्री हुआ करते थे। इनके ऊपर राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन जिसे एन आर एच एम भी कहा जाता है में 400 करोड़ के घोटाले का आरोप है। सीबीआई ने इन्हें गिरफ़्तार कर ग़ाज़ियाबाद के डासना जेल में रखा था।आरोप है कि, काला धन खपाने के लिए इन्होंने आईएएस प्रदीप शुक्ला के रिश्तेदारों का सहारा लिया था। इस घोटाले में शुक्ला के सात रिश्तेदार भी आरोपी हैं। पत्नी शिवकन्या कुशवाहा भी अभियुक्त हैं। घोटाले से जुड़े दो सीएमओ विनोद आर्या और बीपी सिंह की लखनऊ में हत्या हो चुकी है। एक अन्य डिप्टी सीएमओ वाईएस सचान की लखनऊ जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई।मायावती ने जब इन्हें पार्टी से निकाला तो इन्होंने पहले बीजेपी फिर सपा का दामन थामा। इस दौरान इन्होंने जन अधिकार पार्टी नामक राजनीतिक दल का भी गठन किया। फ़िलहाल जौनपुर से ताल ठोंक रहे हैं।
अब जौनपुर के तीसरे प्रत्याशी श्रीकला रेड्डी की बात करते हैं।ये मूलतः हैदराबाद की रहने वाली हैं। जौनपुर के पूर्व बाहुबली सांसद धनंजय सिंह से पेरिस में शादी कर ये सुर्ख़ियों में आयीं। पहले पति से भी इनकी दो संतानें हैं।हैदराबाद की पेज 3 की पार्टियों की कभी ये जाना पहचाना चेहरा थीं। कुछ साल पहले इनकी बीजेपी में शामिल होने की तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल हुई थीं।वैसे तो इनके ऊपर कोई आरोप नहीं है। लेकिन एक बाहुबली की पत्नी होना ही इनका इस चुनाव में सबसे निगेटिव पक्ष है। धनंजय अपहरण के एक मामले में जेल में सजा काट रहे हैं। श्रीकला जौनपुर की ज़िला पंचायत अध्यक्ष भी हैं। कहा जाता है कि पर्दे के पीछे से धनंजय सिंह ही इनके चुनाव प्रचार की कमान थामे हुए हैं। धनंजय सिंह बसपा के टिकट पर सन् 2009 में जौनपुर से सांसद चुने गये थें। बाद में मायावती से अनबन होने पर बीएसपी से निष्कासित कर दिये गये थे ।अब कालचक्र ने इन्हें फिर बसपा के नज़दीक ला दिया।अब इन तीनों प्रत्याशियों के बायो डाटा सामने आने के बाद सबसे मुश्किल में मतदाता हैं कि किसे चुने और किसे न चुने। कश्मकश चुनाव की तारीख़ 25 मई तक चलती रहेगी।
