वाराणसी
उर्दू प्राइमर का निर्माण भी नये परिवेश के अनुरूप किया जा रहा है
जो नयी सामग्री हिंदी में तैयार हो रही है वही उर्दू में भी है
रिपोर्ट – मनोकामना सिंह
वाराणसी| नव भारत साक्षरता अभियान के तहत ही उर्दू प्राइमर का निर्माण भी नये परिवेश के अनुरूप किया जा रहा है। जो चीजे हिंदी में बन चुकी हैं, उर्दू में उसी की रचना या कहें अनुवाद हो रहा है साथ ही जो नयी सामग्री हिंदी में तैयार हो रही है वही उर्दू में भी है। उक्त बातें एन सी ई आर टी तथा काशी विद्यापीठ द्वारा नव शिक्षा अभियान पर पांच दिवसीय कार्यशाला के तीसरे दिन आज वर्कशॉप की प्रभारी तथा एन सी ई आर टी की प्रो चमन आरा खां ने उर्दू प्राइमर पर चर्चा करते हुए बताई। आगे उन्होंने कहा कि प्रौढ़ लोगों के लिए है जो साक्षर नहीं है। इसमें पढ़ने लिखने के साथ ही साथ जटिल जीवन शैली को आसान बनाने का प्रारूप तैयार किया जा रहा है। जो लम्बी अवधि तक जीवन में काम आए। प्रौढ़ लोगों को वितीय साक्षरता, डिजिटल साक्षरता, हेल्थ और हाइजीन, योगा, आपदा प्रबंधन आदि जीवन से जुड़े विषयों को किस तरह प्रौढ़ सामना करें, इस्तेमाल करन आना चाहिए। इसी कड़ी में ई कंटेट बन रहे हैं। जो परीक्षण मद और कार्य पत्रक के रूप में होगा।
आगे उन्होंने कहा कि रोजमर्रा के जीवन मे मन बहलाने के लिए हम सब गाते-बजाते हैं, फिल्में , नाटक आदि लिखते हैं। जैसे कोई सामान बेचते या खरीदते समय आपको कौन-कौन सी परेशानियां आती हैं। आपके बाज़ार में ऐसी कौन कौन सी चीजें हैं, जो आप खरीद पाते हैं। ऐसी कौन सी चीजें हैं जो आप नहीं खरीद पाते। जैसे एक उदाहरण से बताती हूँ अनोखी ने मेले में तरह तरह के डिज़ाइनों से बनीं लड़ियां देखीं। अनोखी अपने लिए कुछ झंडियां बना रही है तो हम कैसे झंडिया बनाने में उसकी मदद कर सकते हैं। इसी तरह से कहानी के माध्यम से वितीय साक्षरता के तहत बैंक सम्बन्धी आवश्यक जानकारी आदि प्रारूप का हिस्सा हैं।
महत्वपूर्ण जीवन के कौशल से सम्बंधित प्रमुख घटकों जैसे डिजिटल, वितीय, कानूनी,मतदान, स्वच्छता से जुड़ी
कहानियों की बारीकियों पर एन सी आर टी की डॉ यासमीन असरफ, याचना गुप्ता, महिमा बंसल, शिवा श्रीवास्तव ने प्रकाश डाला। कार्यशाला में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के शिक्षा शास्त्र विभाग के डॉ सोमू सिंह, डॉ नफीस बानो प्रो शाहिना रिज़वी, प्रो आफताब अहमद, डॉ आरिफ हसन काज़मी, डॉ गुलजबी, डॉ सीमान्त प्रियदर्शी, सहित अन्य उपस्थित रहे।
