वाराणसी
अजय राय के खिलाफ महोबा में दर्ज एफआईआर लोकतंत्र और जनआवाज पर हमला : राघवेंद्र चौबे
वाराणसी। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय के खिलाफ महोबा में दर्ज एफआईआर की कड़ी निंदा करते हुए वाराणसी महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि* यह कार्रवाई पूरी तरह राजनीतिक प्रतिशोध और विपक्ष की आवाज को दबाने की साजिश का हिस्सा है। भारतीय जनता पार्टी और केंद्र उत्तर प्रदेश सरकार जनता के मुद्दों को उठाने वाले निर्भीक नेता अजय राय से भयभीत हो चुकी है, इसलिए लोकतांत्रिक विरोध की आवाज को मुकदमों और प्रशासनिक दबाव के माध्यम से दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
महोबा में जिस छात्रा के साथ कई दिनों तक दरिंदगी और दुष्कर्म जैसी जघन्य घटना हुई, उसके परिवार से मिलने और न्याय की लड़ाई में साथ खड़े होने के लिए अजय राय स्वयं महोबा पहुंचे थे। प्रशासन ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन तमाम बाधाओं के बावजूद उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात की, उनका दर्द सुना और न्याय की मांग को मजबूती से उठाया।
उन्होंने कहा कि जब सरकार और प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हट जाते हैं, तब विपक्ष का दायित्व बनता है कि वह पीड़ितों की आवाज बने और अजय राय लगातार यही कार्य कर रहे हैं।वह केवल महोबा ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक हर उस स्थान पर पहुंचे हैं जहां अन्याय, अत्याचार और शोषण की घटनाएं हुई हैं। चाहे किसानों, युवाओं, महिलाओं या आम नागरिकों के साथ अन्याय का मामला हो, अजय राय हमेशा पीड़ितों के साथ खड़े दिखाई दिए हैं। विभिन्न घटनाओं में मृतकों और पीड़ित परिवारों से मिलकर उन्होंने सरकार की विफलताओं को उजागर किया और न्याय की मांग की।
नीट परीक्षा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हुए पेपर लीक तथा अव्यवस्थाओं से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ। अनेक छात्र मानसिक तनाव और निराशा का शिकार हुए। ऐसे परिवारों के बीच भी अजय राय पहुंचे, उनका दुख साझा किया और युवाओं की आवाज को सरकार तक पहुंचाने का कार्य किया। भाजपा सरकार को यह जनसंवाद और जनसंघर्ष पसंद नहीं आ रहा है, इसलिए अजय राय को निशाना बनाया जा रहा है। अजय राय काशी की धरती के पुत्र हैं और उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया बनारसी लोकभाषा एवं काशी की परंपरागत बोलचाल की शैली में व्यक्त की थी।
काशी की भाषा, संस्कृति और लोकाचार से परिचित हर व्यक्ति यह जानता है कि यहां अनेक शब्द और मुहावरे सामान्य सामाजिक व्यवहार का हिस्सा हैं। लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने जानबूझकर उनके बयान को तोड़-मरोड़कर राष्ट्रीय स्तर पर अभद्र टिप्पणी के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। यह भाजपा की ओछी मानसिकता और राजनीतिक हताशा का प्रमाण है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काशी के सांसद हैं और अजय राय भी काशी के निवासी हैं। ऐसे में काशी की स्थानीय भाषा और लोक शैली को अभद्रता का नाम देना स्वयं काशी की सांस्कृतिक परंपरा का अपमान है।
भाजपा के नेता काशी की आत्मा और उसकी भाषाई विरासत को समझने के बजाय उसका राजनीतिक दुरुपयोग कर रहे है भाजपा के कई बड़े नेता लगातार कांग्रेस नेता सोनिया गांधी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, गांधी परिवार और विपक्षी नेताओं के खिलाफ व्यक्तिगत एवं अमर्यादित टिप्पणियां करते रहते हैं। निशिकांत दुबे, मनोज तिवारी, रवि किशन, गिरिराज सिंह, अनुराग ठाकुर सहित लंबी लिस्ट है अनेक भाजपा नेताओं के बयान सार्वजनिक रिकॉर्ड में मौजूद हैं, लेकिन तब भाजपा को मर्यादा और शालीनता याद नहीं आती।
उन्होंने कहा कि बनारस के स्थानीय भाजपा विधायक और मंत्री भी लगातार अजय राय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करते रहे हैं। भाजपा को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने नेताओं के आचरण की समीक्षा करनी चाहिए और अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।आज भारतीय जनता पार्टी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार राहुल गांधी, कांग्रेस पार्टी और पूरे विपक्ष की जनआवाज से घबराई हुई है। जनता के सवालों का जवाब देने के बजाय मुकदमे दर्ज कराना और प्रशासनिक दबाव बनाना उनकी कार्यशैली बन चुकी है। लेकिन कांग्रेस पार्टी न कभी डरी है, न झुकी है और न ही आगे झुकेगी।
महोबा में अजय राय के खिलाफ दर्ज एफआईआर पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण, राजनीतिक प्रेरित और लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है। कांग्रेस पार्टी इसकी कड़े शब्दों में निंदा करती है तथा स्पष्ट करती है कि अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष की यह आवाज किसी मुकदमे या दबाव से रुकने वाली नहीं है। अजय राय जनता के बीच थे, जनता के बीच हैं और जनता के अधिकारों की लड़ाई आगे भी पूरी मजबूती से लड़ते रहेंगे।
