वाराणसी
पराड़कर भवन में आनंद परमानंद जयंती समारोह, साहित्यकारों ने दी काव्यांजलि
वाराणसी । पराड़कर भवन, मैदागिन में “आनंद परमानंद जयंती–2026” का आयोजन श्रद्धा, उत्साह और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। साहित्य और संस्कृति की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के प्रख्यात साहित्यकारों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों, कला प्रेमियों तथा ज्ञान संकुल सिंह की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत जनकवि आनंद परमानंद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इसके बाद आयोजित विचार गोष्ठी में ‘जनकवि आनंद परमानंद’ विषय पर विद्वानों ने गंभीर और सारगर्भित विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. श्रद्धानंद ने की।
मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. मधुकर मिश्र (संपादक, कविताबरा), डॉ. इंदीवर, डॉ. राम सुधाकर सिंह (पूर्व विभागाध्यक्ष, उदय प्रताप कॉलेज, वाराणसी) तथा डॉ. बलराज पांडे (पूर्व विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, काशी हिंदू विश्वविद्यालय) ने आनंद परमानंद के साहित्यिक योगदान, जनपक्षधरता और सामाजिक सरोकारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने उन्हें जनभावनाओं की सशक्त आवाज बताया।
स्मृति सत्र में शतरुद्र प्रकाश और टीकाराम शर्मा ने अपने संस्मरण साझा किए। उनके अनुभवों ने सभागार के वातावरण को भावुक और प्रेरणादायक बना दिया। इन संस्मरणों के माध्यम से आनंद परमानंद के व्यक्तित्व के अनेक जीवंत पक्ष सामने आए। कार्यक्रम के दूसरे चरण में काव्य गोष्ठी आयोजित हुई। ‘काव्यांजलि’ के अंतर्गत कवियों ने अपनी रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया, जिससे श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।
काव्य पाठ में संवेदना, व्यंग्य, प्रेम और सामाजिक यथार्थ के विविध रंग देखने को मिले।इसी क्रम में काव्य संध्या के दौरान उत्कृष्ट साहित्य सृजन के लिए तीन साहित्यकारों को “श्री आनंद परमानंद साहित्य सम्मान–2026” से सम्मानित किया गया। जनकवि आनंद परमानंद की चर्चित ग़ज़ल संग्रह “सड़क पर ज़िंदगी” के प्रकाशक डॉ. उमाशंकर चतुर्वेदी ‘कंचन’ और डॉ. विनोद राव पाठक को उनके महत्वपूर्ण साहित्यिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
वहीं वरिष्ठ एवं ख्यातिलब्ध कवि डॉ. राम अवतार पांडे को उनके समग्र साहित्य सृजन के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया। सम्मान समारोह ने काव्य संध्या की गरिमा को और ऊँचा कर दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. धर्मेंद्र गुप्त ‘साहिल’ ने प्रभावपूर्ण और कुशल शैली में किया।
सायं 5 बजे शुरू हुए इस आयोजन को उपस्थित अतिथियों ने एक यादगार और प्रेरणादायक साहित्यिक संध्या बताया। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों और सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
