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वाराणसी

दीवारों पर नंबर जारी, लेकिन सेवा बंद—अस्पतालों की व्यवस्था पर उठे सवाल

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CMO बोले – “इमरजेंसी नंबर बंद होने की जानकारी नहीं, जल्द होगा सुधार”

वाराणसी। जिले में स्वास्थ्य विभाग की गंभीर अनदेखी सामने आई है, जहां 40 लाख की आबादी वाले इस जनपद में 64 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) के सरकारी सीयूजी नंबर रिचार्ज न होने के कारण बंद पड़े हैं। बीते रविवार को अस्पतालों की स्थिति की पड़ताल के दौरान यह मामला उजागर हुआ। शासन स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के बीच आपात स्थिति में संपर्क का प्रमुख माध्यम ही निष्क्रिय पाया गया।

अस्पतालों की दीवारों और प्रवेश द्वारों पर इन नंबरों का प्रचार जारी है, जिससे मरीज और उनके परिजन भ्रमित हो रहे हैं। दुर्घटना या प्रसव जैसे आपातकालीन हालात में लोग डॉक्टरों या अस्पताल प्रबंधन से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। जिला अस्पताल, मंडलीय अस्पताल और रामनगर स्थित एलबीएस अस्पताल में लगे बैनरों पर भी सीएचसी-पीएचसी के नंबर प्रदर्शित हैं, लेकिन अधिकांश नंबरों पर कॉल करने पर इनकमिंग सेवा बंद या नंबर अमान्य होने का संदेश मिलता है।

स्थिति के कारण विशेष रूप से रात के समय आने वाले मरीजों को अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है, क्योंकि वे पहले से फोन कर एंबुलेंस या डॉक्टर की उपलब्धता की जानकारी नहीं ले पा रहे हैं।

एक सीएचसी के प्रभारी चिकित्सक के अनुसार, इन 64 केंद्रों के सिम कार्ड के रिचार्ज के लिए आवश्यक बजट समय पर जारी नहीं किया गया, जिससे यह सुविधा ठप हो गई। करीब छह माह पहले कुछ नंबरों का रिचार्ज हुआ था, लेकिन बाद में सभी सेवाएं बंद हो गईं। यह स्थिति सड़क दुर्घटना या प्रसव पीड़ा जैसे मामलों में तत्काल सहायता की जरूरत वाले मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।

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इस संबंध में कार्यवाहक मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश प्रसाद ने बताया कि इमरजेंसी नंबरों के बंद होने की जानकारी उन्हें नहीं थी। मामले की जांच कराकर इसे शीघ्र दुरुस्त कराया जाएगा।

इधर, प्रभावित लोगों ने भी अपनी परेशानी साझा की है। सनी वर्मा ने बताया कि उनकी चाची को रात में हार्ट अटैक आने पर शिवपुर पीएचसी के आपातकालीन नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो सकी। अंततः उन्हें एंबुलेंस से 12 किलोमीटर दूर बीएचयू ले जाना पड़ा। वहीं अमित सेठ ने बताया कि उनके नानाजी की तबीयत बिगड़ने पर चिरईगांव पीएचसी से संपर्क नहीं हो सका, जिसके चलते उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

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