वाराणसी
मंदिर चौक में लगी विक्रमादित्य वैदिक घड़ी बनी आकर्षण का केंद्र
वैदिक समय गणना के साथ पंचांग और मौसम की जानकारी दे रही अनोखी घड़ी
वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के परिसर में स्थापित 740 किलोग्राम वजनी विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ने काम करना शुरू कर दिया, जिसके जरिए भक्तों को समय, ग्रहों की स्थिति और अन्य वैदिक गणनाओं की जानकारी एक ही स्थान पर मिलने लगी है। ब्रह्म मुहूर्त से ही सक्रिय इस घड़ी ने मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींचा, जहां दर्शन-पूजन के बाद लोग डिजिटल डिस्प्ले पर प्रदर्शित भारतीय कालगणना आधारित रियल टाइम डेटा देखकर आश्चर्य व्यक्त करते नजर आए।
मंदिर चौक में गंगा द्वार के पास स्थापित इस वैदिक घड़ी को शनिवार को तकनीकी रूप से जोड़ा गया था, जिसके बाद रविवार से इसका संचालन प्रारंभ हुआ। वहीं सोमवार को भी काफी संख्या में काशी विश्वनाथ का दर्शन करने के पश्चात श्रद्धालुओं ने इस घड़ी का दीदार किया। इससे पूर्व तीन अप्रैल को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह घड़ी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट की थी। महाकाल मंदिर के बाद यह दूसरा ज्योतिर्लिंग है, जहां इस प्रकार की वैदिक घड़ी स्थापित कर संचालित की जा रही है।
यह घड़ी भारतीय समय गणना के प्राचीन सिद्धांतों पर आधारित है, जिसमें एक दिन को सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक 30 मुहूर्तों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक मुहूर्त लगभग 48 मिनट का होता है, जबकि दिन भर में 900 कला और 27,000 काष्ठा की गणना की जाती है। घड़ी के माध्यम से न केवल वैदिक समय, बल्कि सूर्योदय-सूर्यास्त, ग्रहों की स्थिति, भद्रा काल, चंद्र स्थिति और मौसम संबंधी जानकारी भी उपलब्ध हो रही है। इसके साथ ही भारतीय स्टैंडर्ड टाइम और स्थानीय लोकेशन के अनुसार समय निर्धारण की सुविधा भी इसमें शामिल है।
मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि यह वैदिक घड़ी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी है और इसमें वैदिक कालगणना से जुड़े अनेक पहलुओं को समाहित किया गया है। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर सूर्योदय का जो समय होगा, उसी के अनुसार वहां की कालगणना निर्धारित होगी और भारतीय मानक समय उससे संबद्ध रहेगा। घड़ी के रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी मंदिर न्यास परिषद द्वारा निभाई जाएगी।
इसके साथ ही विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का एक मोबाइल एप भी विकसित किया गया है, जिसमें 30 घंटे की वैदिक समय प्रणाली, पंचांग, विक्रम संवत कैलेंडर, मुहूर्त अलार्म और विभिन्न स्थानों का मौसम संबंधी लाइव डेटा उपलब्ध कराया गया है। यह एप 180 से अधिक भाषाओं में उपलब्ध है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी के अनुसार, इस पहल से युवा पीढ़ी को भारतीय समय चक्र को समझने में मदद मिलेगी और पारंपरिक कालगणना के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
