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वाराणसी

Chaitra Navratri : चतुर्थी पर श्रृंगार गौरी मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

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विशेष अवसरों पर ही मिलते हैं दर्शन

वाराणसी। ज्ञानवापी परिसर की पश्चिमी दीवार से सटे प्राचीन मां श्रृंगार गौरी मंदिर में चैत्र नवरात्रि की चतुर्थी तिथि पर रविवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। धार्मिक मान्यता के अनुसार देवी गौरी को माता पार्वती का स्वरूप माना जाता है और यह स्थल लंबे समय से नवरात्रि के दौरान पूजा का प्रमुख केंद्र रहा है। वर्तमान में सुरक्षा कारणों के चलते यहां वर्ष में केवल चैत्र नवरात्रि की चतुर्थी और कुछ विशेष अवसरों पर ही दर्शन-पूजन की अनुमति दी जाती है।

रविवार को श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में पहुंचकर मां श्रृंगार गौरी के दर्शन किए और मुक्ति की कामना के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मंदिर मस्जिद की पश्चिमी बाहरी दीवार से सटे चबूतरे पर स्थित है, जहां साल में एक बार निर्धारित समय पर ही पूजा की जाती है। मान्यता है कि रामकथा के आरंभ से पूर्व माता श्रृंगार गौरी की पूजा की जाती है, जिससे इस स्थान का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।

इस मंदिर का ऐतिहासिक संदर्भ भी विशेष महत्व रखता है। वर्ष 1992 में बाबरी विध्वंस से पूर्व यहां नियमित रूप से पूजा होती थी, लेकिन बाद में सुरक्षा कारणों से इसे सीमित कर दिया गया और अब केवल विशेष अवसरों पर ही पूजा की अनुमति दी जाती है। वर्तमान में नियमित पूजा-अर्चना की अनुमति को लेकर न्यायालय में वाद लंबित है।

पूजा के लिए ज्ञानवापी परिसर के पीछे स्थित चबूतरे की सफाई कर उसे सिंदूर से रंगा जाता है और वहां मां श्रृंगार गौरी का मुखौटा स्थापित कर पूजा संपन्न कराई जाती है। दर्शन के दौरान कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए, जिसमें श्रद्धालुओं को मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं दी गई।

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श्रद्धालुओं को निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ही दर्शन की अनुमति दी जाती है। यह स्थल न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय संस्कृति और इतिहास की महत्वपूर्ण धरोहर के रूप में भी अपनी पहचान रखता है। हर वर्ष यहां दर्शन करने वालों की संख्या में वृद्धि इस स्थान की बढ़ती धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाती है।

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