गोरखपुर
आम एंटीबायोटिक फेल, अब मरीजों को लग रहे महंगे इंजेक्शन
दवा बेअसर होने से इलाज महंगा, मरीजों पर बढ़ा बोझ
ICMR रिपोर्ट में खुलासा – सस्ती दवाएं नहीं कर रहीं काम
गोरखपुर। देश में एंटीबायोटिक दवाओं की प्रभावशीलता को लेकर एक गंभीर स्थिति उभरकर सामने आई है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (Indian Council of Medical Research) के ताजा अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है कि बड़ी संख्या में मरीजों पर सस्ती और सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं कर रही हैं। बस्ती मंडल प्रभारी अरुण कुमार मिश्र के अनुसार, अस्पतालों में भर्ती मरीजों पर किए गए अध्ययन में 70 से 90 प्रतिशत मामलों में बैक्टीरिया इन दवाओं के प्रति प्रतिरोधक हो चुके हैं। इस स्थिति को ड्रग रेजिस्टेंस कहा जाता है, जिसमें दवाएं संक्रमण को समाप्त करने में असफल रहती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, जब सामान्य एंटीबायोटिक्स प्रभाव नहीं दिखातीं, तो चिकित्सकों को मजबूर होकर मरीजों को महंगे इंजेक्शन और उच्च श्रेणी की एंटीबायोटिक दवाएं देनी पड़ती हैं। इससे इलाज का खर्च कई गुना बढ़ जाता है और मरीजों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ता है।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि निमोनिया, ब्लड इन्फेक्शन (सेप्सिस), यूरिन इन्फेक्शन सहित अन्य गंभीर संक्रमणों में उपयोग होने वाली दवाओं की प्रभावशीलता तेजी से घट रही है। विशेष रूप से आईसीयू में भर्ती मरीजों में यह समस्या अधिक देखी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार ड्रग रेजिस्टेंस बढ़ने के पीछे बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना, दवा का पूरा कोर्स न करना, आवश्यकता न होने पर भी एंटीबायोटिक का उपयोग और अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण की कमी जैसे प्रमुख कारण जिम्मेदार हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि एंटीबायोटिक का दुरुपयोग इसी तरह जारी रहा, तो भविष्य में सामान्य संक्रमण भी जानलेवा साबित हो सकते हैं और कई मामलों में उपचार के विकल्प सीमित होते जाएंगे।
डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि बिना चिकित्सकीय परामर्श के दवाएं न लें, एंटीबायोटिक का पूरा कोर्स पूरा करें, स्वच्छता और संक्रमण से बचाव पर ध्यान दें तथा छोटी बीमारियों में एंटीबायोटिक के अनावश्यक उपयोग से बचें।
आईसीएमआर की यह रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि सस्ती और आम दवाओं का असर तेजी से खत्म हो रहा है। समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो इलाज महंगे इंजेक्शन और सीमित विकल्पों तक सिमट सकता है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
