गोरखपुर
बिहारी बुजुर्ग में नौ दिवसीय श्रीराम महायज्ञ का दिव्य समापन
कथा, हवन और रामलीला से भक्तिमय हुआ समूचा क्षेत्र
गोरखपुर। जनपद के खजनी क्षेत्र स्थित ग्राम सभा डोडो बिहारी बुजुर्ग में आयोजित नौ दिवसीय श्री राम महा यज्ञ, श्रीराम कथा एवं रामलीला महोत्सव अपने पावन समापन की ओर अग्रसर है। दिनांक 15 मार्च 2026, रविवार को इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान का विश्राम दिवस एवं हवन कार्यक्रम संपन्न होगा। पूरे क्षेत्र में इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत वातावरण देखने को मिल रहा है, मानो ग्राम बिहारी बुजुर्ग स्वयं अयोध्या धाम की पावन आभा में आलोकित हो उठा हो।
इस दिव्य आयोजन के यज्ञाचार्य पंडित प्रवीण कुमार पाण्डेय के कुशल मार्गदर्शन में सभी आचार्यगणों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ को अत्यंत विधि-विधान से संपन्न कराया। ग्रामवासियों तथा क्षेत्रीय जनमानस के अपार सहयोग और मां काली की असीम कृपा से यह महायज्ञ अपने पूर्णत्व की ओर बढ़ रहा है। यज्ञाचार्य पंडित प्रवीण कुमार पाण्डेय ने भावुक शब्दों में कहा कि “जहां रामकथा और यज्ञ का संगम होता है, वहां स्वयं देवताओं का निवास होता है। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को धर्म, मर्यादा और सदाचार की राह दिखाने वाला एक पवित्र उत्सव है।”
प्रत्येक दिन सुबह यज्ञ एवं पूजा-अर्चना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ होता रहा, वहीं दोपहर 1 बजे से शाम 7 बजे तक श्रीराम कथा का दिव्य रसपान कराया गया। इस अवसर पर अयोध्या से पधारे कथा व्यास कृष्ण मोहन पांडेय एवं शैल प्रिया पांडेय ने अपने मधुर वाणी, मार्मिक प्रसंगों और भावपूर्ण व्याख्यान से श्रद्धालुओं को भक्ति भाव में डुबो दिया। उनके द्वारा प्रस्तुत रामचरित के प्रसंगों में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्श जीवन, धर्म, त्याग और करुणा का ऐसा भावपूर्ण चित्रण हुआ कि श्रोताओं की आंखें कई बार श्रद्धा और भावुकता से नम हो उठीं।

कथा के दौरान जब-जब राम जन्म, वनगमन, केवट प्रसंग और भरत मिलाप जैसे मार्मिक प्रसंगों का वर्णन हुआ, तब पूरा पंडाल “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुजन कथा के अमृत में इस प्रकार तल्लीन हो जाते थे मानो वे स्वयं उस दिव्य युग के साक्षी बन गए हों।
रात्रि में 8 बजे से मध्यरात्रि 12 बजे तक रामलीला का मनोहारी मंचन किया गया, जिसने दर्शकों को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया। कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति और भावपूर्ण अभिनय ने रामकथा के प्रत्येक प्रसंग को सजीव बना दिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई इस अलौकिक आयोजन का हिस्सा बनकर स्वयं को धन्य महसूस कर रहा है।
विशेष बात यह रही कि आयोजन के प्रथम दिवस से लेकर समापन दिवस तक श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती रही। आसपास के गांवों सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग कथा श्रवण और यज्ञ दर्शन के लिए पहुंचे। गांव का प्रत्येक मार्ग भक्तों की चहल-पहल से जीवंत दिखाई देता रहा।
यज्ञाचार्य पंडित प्रवीण कुमार पाण्डेय ने अंत में कहा कि “रामकथा केवल कथा नहीं, बल्कि मानव जीवन को मर्यादा, प्रेम और सद्भाव की दिशा देने वाली दिव्य धारा है। यदि समाज राम के आदर्शों को अपनाए, तो प्रत्येक गांव और प्रत्येक घर अयोध्या बन सकता है।”
इस प्रकार बिहारी बुजुर्ग में आयोजित यह नौ दिवसीय महायज्ञ, कथा और रामलीला का भव्य संगम क्षेत्र के लिए एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक पर्व बन गया है, जिसकी पावन स्मृतियां श्रद्धालुओं के हृदय में लंबे समय तक भक्ति का दीप जलाती रहेंगी।
