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गोरखपुर

सृष्टि की अधिष्ठात्री शक्ति और समाज की जीवनधारा है नारी

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गोरखपुर। 8 मार्च को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि नारी शक्ति के सम्मान, संघर्ष और योगदान को स्मरण करने का पावन अवसर है। नारी इस सृष्टि की अधिष्ठात्री शक्ति है, जिसके बिना संसार की कल्पना अधूरी है। वह माँ के रूप में ममता की मूर्ति, बहन के रूप में स्नेह की धारा और पत्नी के रूप में जीवन की सहचरी बनकर समाज को संबल प्रदान करती है।

मानव समाज की जड़ता को दूर कर उसे जागृत और प्रगतिशील बनाने में नारी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। अपने धैर्य, त्याग और करुणा के भाव से वह परिवार और समाज में संस्कारों की ज्योति जलाती है। नारी केवल घर की सीमा तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, विज्ञान, राजनीति, साहित्य और सेवा के हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का उज्ज्वल प्रकाश बिखेर रही है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज नारी के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक बने। नारी के सुंदर आचरण, संस्कार और समर्पण की भावना ही परिवार और समाज को मजबूत आधार प्रदान करती है।

महिला दिवस हमें यह प्रेरणा देता है कि हम नारी के गौरव को समझें, उनके योगदान का सम्मान करें और समानता, सम्मान तथा प्रेम से परिपूर्ण समाज की स्थापना में अपना योगदान दें। यही सच्चे अर्थों में महिला दिवस की सार्थकता है।

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