वाराणसी
दालमंडी में बनेगा इलेक्ट्रॉनिक हब वाला मेगा कॉम्प्लेक्स!
वाराणसी। दालमंडी प्रोजेक्ट के अंतर्गत चल रहा ध्वस्तीकरण कार्य मई माह तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद निर्माण कार्य के तहत कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाए जाने की चर्चा तेज हो गई है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक यह कॉम्प्लेक्स इलेक्ट्रॉनिक आइटम के हब के रूप में विकसित किया जाएगा। दालमंडी प्रोजेक्ट की चौड़ाई और स्वरूप को लेकर भी अब तस्वीर साफ होने लगी है। माना जा रहा है कि जल्द ही इसका विस्तृत खाका सार्वजनिक किया जाएगा।
पिछले वर्ष 29 अक्टूबर से दालमंडी में जारी ध्वस्तीकरण अभियान के बाद अब परियोजना के अगले चरण की जानकारियां सामने आने लगी हैं। इस योजना के तहत 650 मीटर लंबी दालमंडी गली की चौड़ाई बढ़ाकर 17.4 मीटर की जाएगी। परियोजना से जुड़ी विस्तृत जानकारी अब धीरे-धीरे स्पष्ट हो रही है। दालमंडी प्रोजेक्ट के पहले कमर्शियल कॉम्प्लेक्स का स्वरूप भी सामने आने लगा है। माना जा रहा है कि जिन लोगों की दुकानें प्रभावित हुई हैं, उन्हें यहां प्राथमिकता के आधार पर स्थान दिया जा सकता है।
दालमंडी में दावर खान ने चौड़ीकरण परियोजना के लिए अपने भवन की रजिस्ट्री कराई थी। प्रस्तावित कमर्शियल कॉम्प्लेक्स तीन मंजिला होगा, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक और ई-कॉमर्स से संबंधित दुकानें संचालित होंगी। इस इमारत में करीब दस से बारह दुकानों की व्यवस्था की जाएगी।

दालमंडी प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद यहां की संपत्तियों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। वर्तमान में दालमंडी क्षेत्र का सर्किल रेट काफी कम है और मुआवजा भी उसी आधार पर दिया गया है। यहां मौजूदा सर्किल रेट 44 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर है, जबकि प्रभावित लोगों को 88 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा दिया गया है।
पीडब्ल्यूडी की ओर से दालमंडी के 3डी मैप का वीडियो भी जारी किया गया था। पीडब्ल्यूडी के एक्ससीएन केके सिंह के अनुसार भविष्य में दालमंडी कैसी दिखाई देगी, इसे दर्शाने के लिए यह वीडियो सार्वजनिक किया गया है। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत पूरे 650 मीटर क्षेत्र को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया जाएगा। आने वाले समय में यह गली स्मार्ट रोड के रूप में पहचानी जाएगी।
दालमंडी प्रोजेक्ट का उद्देश्य वाराणसी आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए काशी विश्वनाथ धाम तक पहुंच को अधिक सुगम बनाना है। इस योजना के अंतर्गत 650 मीटर लंबी और 17.4 मीटर चौड़ी सड़क बनाई जाएगी, जिसके लिए 187 भवनों को हटाया जाएगा। इनमें आधा दर्जन मस्जिदें भी शामिल हैं। इस परियोजना पर सरकार लगभग 220 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
अब तक इस प्रोजेक्ट में सौ से अधिक भवनों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी की जा चुकी है, जबकि लगभग 40 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में वितरित किए गए हैं। प्रशासन को मई तक जमीन खाली कराने के साथ 31 अगस्त तक परियोजना को पूरा करना है।
पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता के के सिंह ने बताया कि क्षेत्र में मौजूद मस्जिदों के मुतवल्लियों और प्रबंधन समितियों से लगातार वार्ता की जा रही है। समितियों के समक्ष विभिन्न विकल्प भी रखे गए हैं। यदि वक्फ की समान क्षेत्रफल वाली जमीन उपलब्ध कराई जाती है तो सरकार वहां मस्जिद निर्माण की लागत वहन करेगी। वहीं, यदि उपयुक्त सरकारी भूमि चिन्हित होती है तो उसी क्षेत्रफल में नई मस्जिद का निर्माण कराया जाएगा। इस संबंध में जो निर्णय लिया जाएगा, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
