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वाराणसी

“पैसे कमाओ लेकिन दिल दुखा कर नहीं” : पं. प्रदीप मिश्रा

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वाराणसी। पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिवमहापुराण कथा में बताया कि धन कमाना आवश्यक है लेकिन किसी का दिल दुखा कर या किसी को कष्ट देकर नहीं यदि आपकी कमाई किसी के लिए पीड़ा का कारण बन रही है तो ऐसा धन कभी सुखदायक नहीं हो सकता। मेहनत और ईमानदारी से अर्जित धन ही जीवन को सार्थक बनाता है।

कथा का शुभारंभ:

20 नवंबर से शुरू हुई इस सात दिवसीय कथा के पांचवें दिन, पंडित प्रदीप मिश्रा ने गणेश वंदना और “ओम नमः शिवाय” की धूनी के साथ कथा का प्रारंभ किया। शिव धूनी की गूंज और शहनाई की धुन ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर झूमते और नृत्य करते रहे।

शिव की पंचायत का उल्लेख:

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गुरुजी ने बताया कि भगवान शिव अपने पांचों सहयोगियों के साथ एक पंचायत करते हैं, जो यह निर्णय करती है कि आपकी भक्ति और व्रत का फल कब और कैसे दिया जाए। इस पंचायत में भगवान सूर्य, माता पार्वती, गणेश आदि सम्मिलित होते हैं।

सच्चे मार्ग का निर्णय:

जब आप किसी अच्छे कार्य या शिव कथा में जाने का निश्चय करते हैं तो भगवान शिव आपकी राह आसान कर देते हैं। लेकिन गलत कार्यों या व्यसनों की ओर जाने पर कोई रोकटोक नहीं होती। शिवमहापुराण हमें सिखाती है कि अपने विचारों और निर्णयों को सकारात्मक दिशा में मोड़ें।

पिता और पुत्र का उदाहरण:

गुरुजी ने एक सुंदर उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे मेला घूमते समय बच्चा अपने पिता का हाथ पकड़कर खुश रहता है उसी प्रकार शिवलिंग पर जल चढ़ाने से यह अनुभव होता है कि भगवान शिव ने हमारा हाथ थामा हुआ है। जब तक यह संबंध बना रहता है संसार का हर अनुभव सुखद लगता है।

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कर्कोटेश्वर महादेव का वर्णन:

कथा में स्कंद पुराण के अवंतिका खंड के कर्कोटेश्वर महादेव का उल्लेख किया गया। यह उज्जैन के हरसिद्धि माता मंदिर प्रांगण में स्थित हैं और चौरासी महादेवों में दसवें स्थान पर आते हैं।

जीवन के संदेश:

1. धैर्यपूर्वक जीवन जिएं: गुरुजी ने समझाया कि जीवन की रफ्तार इतनी तेज न हो कि आप कर्ज के बोझ तले दब जाएं। आराम से और सोच-समझकर आगे बढ़ें।

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2. शिवमहापुराण का समाधान: संसार की हर समस्या का समाधान शिवमहापुराण में मिलता है।

कथा के अंत में भगवान शिव, माता पार्वती और कार्तिक जी की भव्य झांकी निकाली गई और आरती के साथ समापन हुआ। इस आयोजन में लाखों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और आयोजन समिति ने इसे सफलतापूर्वक संपन्न किया।

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