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यूपी के शिक्षामित्रों को मानदेय बढ़ोतरी के साथ-साथ मिलेगा एक और तोहफा
ऐसी महिला शिक्षामित्र जो शादी के बाद ससुराल से मायके वाले जिले के प्राइमरी स्कूल में नौकरी करने आती हैं उनके भी मूल जनपद में वापसी की मांग की जा रही है
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत लगभग 1.48 लाख शिक्षामित्रों की समस्याओं को हल करने के प्रति योगी सरकार गंभीर है। बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के पदाधिकारियों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों पर जल्द ही ध्यान दिया जाएगा और समाधान निकाला जाएगा।
वहीं, ऐसी महिला शिक्षामित्र जो शादी के बाद ससुराल से मायके वाले जिले के प्राइमरी स्कूल में नौकरी करने आती हैं उनके भी मूल जनपद में वापसी की मांग की जा रही है। ऐसे करीब 30 हजार शिक्षामित्र हैं। इसके अलावा, आकस्मिक अवकाश को 11 से बढ़ाकर 14 किए जाने और मेडिकल की सुविधा दिए जाने की भी मांग की जा रही है।

पांच कालिदास मार्ग स्थित अपने आधिकारिक निवास पर मुख्यमंत्री ने भाजपा के विधान परिषद सदस्य श्रीचंद शर्मा, धर्मेन्द्र भारद्वाज, और सुरेन्द्र चौधरी के साथ बैठक की, जिसमें शिक्षामित्रों की मांगों पर चर्चा की गई। माना जा रहा है कि उनकी मानदेय में वृद्धि के साथ-साथ उन्हें उनके मूल जनपद में स्थानांतरण (ट्रांसफर) का भी अवसर मिल सकता है।
10 हजार रुपये प्रति मिल रहा मानदेय –
सीएम योगी ने कहा कि वह जल्द बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह और विभागीय अधिकारियों के साथ इस पर बैठक करेंगे। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला और महामंत्री सुशील यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री शिक्षामित्रों की समस्याओं के निराकरण को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं। अभी शिक्षामित्रों को 10 हजार रुपये प्रति महीने मासिक मानदेय दिया जा रहा है और अब इसमें बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। फिलहाल सरकार शिक्षामित्रों की मांगों को पूरी गंभीरता से ले रही है। विधानसभा उपचुनाव के बाद शिक्षामित्रों की मांगें पूरी हो सकती हैं।
वहीं, वर्ष 2014 में जिन शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाया गया था और फिर वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर फिर उन्हें शिक्षामित्र पद पर वापस कर दिया गया। ऐसे शिक्षामित्र अब अपने मूल जनपद में वापसी की मांग कर रहे हैं।
