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पूर्वांचल

वामा संस्था ने धोपाप परिसर में गरीबों को वितरित किया कंबल, भंडारे का हुआ आयोजन

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सुल्तानपुर। अयोध्या में प्रभु श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद पूरा देश दीवाली मना रहा है। ऐसा लग रहा है मानो धरती पर प्रभु श्रीराम जी प्रकट हो गए हो और त्रेता युग चल रहा है। सारा देश राममय हो गया है। हर तरफ जय श्रीराम के नारो की गूंज सुनाई दे रही है। इसी उपलक्ष्य में वामा संस्था के माध्यम से मंगलवार को धोपाप मंदिर पर लगभग 400 ग़रीब असहय लोगों को कंबल दान दिया और उसके बाद ब्राह्मण भोज का आयोजन किया गया।

वामा टीम ने धोपाप धाम पहुँच कर वहाँ लोगों से बात की तो वहां के स्थानीय लोगों ने बताया कि, तीर्थ राज धोपाप सारे पापों को हरने वाली है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार त्रेता युग में प्रभु श्रीराम जब रावण का वध किये तो उनपर ब्रम्हा वध का दोष लगा। अयोध्या वापस लौटते समय उन्होंने ब्रम्हा वध के दोष से मुक्ति पाने के लिए धोपाप के इसी घाट पर स्नान कर ब्रम्हा वध के दोष से मुक्ति प्राप्त की थीं और उसी के पश्चात इस घाट का नाम धोपाप पड़ा।

संस्था के संस्थापक आचार्य देव ने वामा से बात करते हुए बताया कि, मेरा यह मानना है कि भक्तों को आनलाइन मंदिर तक लाना बहुत ही उत्कृष्ट कार्य हैं, जिससे कि जो लोग देश विदेश में सनातनी बैठे हैं उनको वामा संस्था ऑनलाइन पूजा के माध्यम से प्रसिद्ध मंदिरों तक जोड़ने का कार्य करता है। जिससे सनातन धर्म का प्रचार प्रसार होता रहता है। मंदिर का भी विकास और सौन्दरीकरण कार्य भी होता रहता है।

इसके बाद वामा टीम ने कादीपुर में स्थित हनुमान जी के मंदिर जाकर मंदिर के रहस्य को जानने का प्रयास किया तो वहाँ उपस्थित लोगों ने बताया कि, यहां पर हनुमान जी ने कालनेमि नामक राक्षस का वध किया था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार त्रेता युग में जब प्रभु श्रीराम व रावण के बीच युद्ध चल रहा था तब युद्ध में मेघनाथ ने अपने तीर से लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया था। तत्पश्चात सुषेण वैध को बुलाया गया और उनसे प्रभु श्रीराम ने पूछा कि आखिर लक्ष्मण को कैसे ठीक किया जाए तो सुषेण वैध ने ये बताया कि यदि कोई हिमालय पर्वत पर जाकर वहाँ से संजीवनी बूटी लेकर आए तो ही लक्ष्मण को ठीक किया जा सकता है। तब हनुमान जी हिमालय की ओर प्रस्थान कर गए, तो हिमालय जाते समय रावण के आदेश पर कालनेमि नामक राक्षस ने उन्हें रोकने का भरपूर प्रयास किया और हनुमान जी को युद्ध के लिए ललकारा। हनुमान जी ने फिर उस कालनेमि नामक राक्षस का वध कर दिया। इसके बाद संजीवनी बूटी लाने के लिए हिमालय की ओर प्रस्थान कर गए तब से यह स्थान विजेथुवा महावीर हनुमानजी के नाम से आज तक प्रसिद्ध हैं और हज़ारों श्रद्धालु यहाँ दर्शन कर पुण्य के भागी बनते हैं।

इस तरह से यह स्थान धोपाप और विजेथुवा महावीर हनुमानजी का धाम प्रभु श्री राम के साथ उनके वनवास गमन से जुड़ा हुआ है जो अब अयोध्या में प्रभु श्रीराम के प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद से और भी प्रसिद्ध हो रहा है और ये अयोध्या से मात्र 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं।

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