गोरखपुर
प्रशिक्षण के दौरान खराब भोजन पर भड़के जनगणना कर्मी, विरोध में फेंका खाना
गोरखपुर। जनगणना 2027 की तैयारियों के तहत चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम में व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशिक्षण केंद्रों पर दिए जा रहे नाश्ते और भोजन की गुणवत्ता को लेकर कर्मचारियों में भारी असंतोष है। खास तौर पर मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्थित प्रशिक्षण केंद्र से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, जहां प्रशिक्षु प्रतिदिन नाराजगी जता रहे हैं।
कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें जो भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, वह बेहद निम्न स्तर का है। कई बार खाने में कंकड़ और कीड़े मिलने की शिकायत भी की गई है। इसके अलावा भोजन की मात्रा भी पर्याप्त नहीं बताई जा रही है। बीते सोमवार को हालात इतने बिगड़ गए कि कई कर्मचारियों ने विरोध स्वरूप अपना खाना कूड़ेदान में फेंक दिया।
बताया जा रहा है कि सात मई से शुरू होने वाली स्वगणना प्रक्रिया से पहले कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, लेकिन इस दौरान मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी की जा रही है। जिला प्रशासन की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि प्रशिक्षण में किसी प्रकार की असुविधा न हो, लेकिन जमीनी स्थिति इसके उलट नजर आ रही है। कर्मचारियों का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद न तो भोजन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और न ही व्यवस्थाओं में कोई बदलाव किया गया है।
मामला उस समय और तूल पकड़ गया जब कर्मचारियों ने अपने आक्रोश को आंतरिक व्हाट्सएप समूह में साझा करना शुरू किया। आरोप है कि इसके बाद समूह में संदेश भेजने पर रोक लगा दी गई, जिससे उनकी आवाज दब गई। मंगलवार को समूह में कोई संदेश दिखाई नहीं दिया, हालांकि कर्मचारियों की नाराजगी बनी रही। स्थिति यह है कि कई कर्मचारी अब घर से भोजन लेकर प्रशिक्षण में पहुंच रहे हैं।
यह समस्या केवल गोरखपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि मंडल के अन्य जिलों से भी इसी तरह की शिकायतें सामने आई हैं। हाल ही में कुशीनगर के एक प्रशिक्षण केंद्र पर भोजन कूड़ा उठाने वाली गाड़ी से पहुंचाया गया, जिसे देखकर कर्मचारियों ने विरोध करते हुए खाना वापस कर दिया।
कर्मचारियों का कहना है कि भोजन के लिए प्रति व्यक्ति 200 रुपये का प्रावधान है, लेकिन जो खाना दिया जा रहा है, उसकी गुणवत्ता 50 रुपये के स्तर की भी नहीं है। चाय को भी बेहद खराब बताया गया है और नाश्ते में केवल एक-दो बिस्किट देकर औपचारिकता पूरी की जा रही है। पूड़ियां पॉलिथीन में दी जा रही हैं, जबकि चावल और सब्जी के बासी और खराब होने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि यदि उचित भोजन की व्यवस्था नहीं की जा सकती, तो ऐसी व्यवस्था का कोई औचित्य नहीं है। उनका मानना है कि इस तरह का भोजन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। प्रशिक्षण शुरू होने के बाद से ही यह समस्या बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। कई कर्मचारी इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की तैयारी में हैं।
इस संबंध में जिला जनगणना प्रभारी व एडीएम (वित्त एवं राजस्व) विनीत सिंह ने कहा है कि मामले की जांच कराई जाएगी। जिस फर्म को भोजन की जिम्मेदारी दी गई है, उसकी गुणवत्ता की जांच होगी और कर्मचारियों से भी फीडबैक लिया जाएगा। यदि भोजन खराब पाया गया तो संबंधित फर्म के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
