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‘राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं’, गजेंद्र चौहान समेत कलाकारों के तीखे बयान

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प्रयागराज। बागेश्वर धाम में धीरेंद्र शास्त्री द्वारा आयोजित कथा और सभा इन दिनों लगातार चर्चा में बनी हुई है। हाल ही में छत्रपति शिवाजी महाराज पर दिए गए बयान के बाद अब इस सभा में बीआर चोपड़ा के प्रसिद्ध धारावाहिक महाभारत के कलाकारों की मौजूदगी ने लोगों का ध्यान खींचा।

मंच पर युधिष्ठिर, दुर्योधन और श्रीकृष्ण की भूमिका निभा चुके कलाकारों ने हिंदू धर्म की रक्षा और देश में हिंदू राष्ट्र बनाने की आवश्यकता पर खुलकर अपने विचार रखे।सभा में दुर्योधन का किरदार निभाने वाले पुनीत इस्सर ने कहा कि ऐसी सभाओं को देखकर यह महसूस होता है कि हिंदू समाज जागृत हो रहा है और हिंदू राष्ट्र जरूर बनेगा।

उन्होंने माताओं, बहनों और परिवारों से अपील की कि बच्चों को धर्म के प्रति जागरूक बनाएं। उन्होंने जबरन धर्म परिवर्तन और बहू-बेटियों को बहलाकर धर्म परिवर्तन कराने जैसी घटनाओं से सावधान रहने की बात कही। पुनीत इस्सर ने कहा कि किसी भी स्थिति में ऐसा नहीं होना चाहिए।उन्होंने आगे कहा कि शास्त्रों के साथ शस्त्र विद्या का ज्ञान भी जरूरी है।

साथ ही युवाओं को व्यायाम पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि समाज और धर्म की रक्षा के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होना आवश्यक है।युधिष्ठिर की भूमिका निभाने वाले गजेंद्र चौहान ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि महाभारत सबने देखी, लेकिन उसे हमने जिया है।

उन्होंने कहा कि धर्म के खिलाफ काम करने वालों का सत्यानाश होना चाहिए। गजेंद्र चौहान ने कहा कि यदि देश को हिंदू राष्ट्र बनाना है तो यह याद रखना होगा कि कोई भी पुत्र, पिता, परिवार, परंपरा या प्रतिज्ञा राष्ट्र से बड़ी नहीं हो सकती। जहां राष्ट्र की बात आती है, वहां सब कुछ समर्पित करना पड़ता है।

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श्रीकृष्ण की भूमिका निभाने वाले नितीश भारद्वाज ने कहा कि महाभारत आज भी चल रही है, बस उसका स्वरूप बदल गया है। उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा की आवश्यकता आज फिर से महसूस की जा रही है। यह कलियुग है और जब द्वापर युग में धर्म रक्षा की जरूरत पड़ी थी, तो आज उसकी आवश्यकता और अधिक है।

नितीश भारद्वाज ने भगवद्गीता के श्लोक का उल्लेख करते हुए कहा कि जब धर्म रक्षा और विजय सामने खड़ी हो, तब मन में निराशा के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ही नहीं, विदेशों में भी अनेक शक्तियां सक्रिय हैं और हिंदू धर्म पर लगातार आक्रमण हो रहे हैं। हिंदू धर्म आदि-अनादि काल से चला आ रहा एकमात्र धर्म है और इस संस्कृति का बने रहना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने आगे कहा कि हिंदू धर्म बांटने का नहीं, जोड़ने का संदेश देता है, इसलिए समाज में प्रेम बना रहना चाहिए। जो प्रेम करेगा, उससे प्रेम किया जाएगा, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर छत्रपति शिवाजी महाराज की तरह धर्म की रक्षा करना भी आता है, क्योंकि धर्म की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।

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