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पूर्वांचल

नंदगंज में बंदरों का आतंक, बाजार और रेलवे स्टेशन पर हालात बदतर

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वन विभाग और रेलवे प्रशासन पर सवाल

गाजीपुर । जिले के नंदगंज बाजार और रेलवे स्टेशन पर बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। बंदरों के खौफ से लोग अपने घरों की छतों पर जाने से कतराने लगे हैं। छतों पर गेहूं या अन्य अनाज सुखाना अब लगभग असंभव हो गया है, जिससे मजबूरन बाजार से पीसा हुआ आटा खरीदना पड़ रहा है।

रेलवे स्टेशन की स्थिति भी चिंताजनक है। प्लेटफॉर्म नंबर एक पर शाम होते ही बंदरों का झुंड यात्री शेड में डेरा जमा लेता है। वे न सिर्फ यात्री शेड के नीचे मल-मूत्र त्याग कर गंदगी फैलाते हैं, बल्कि यात्रियों के लिए वहां खड़ा होना भी मुश्किल बना देते हैं। सुबह साढ़े चार बजे से सात बजे के बीच तीन पैसेंजर ट्रेनों के यात्रियों को नाक बंद करके प्लेटफॉर्म पर खड़ा रहना पड़ता है।

बाजार में भी बंदरों का हंगामा
बाजार में हर दिन सुबह और शाम चार से पांच सौ बंदरों का झुंड इकट्ठा होकर सड़कों और छतों पर उधम मचाता है। बंदरों का झुंड आपस में झगड़ता है और लोगों पर हमला करने से भी नहीं चूकता। बंदरों ने कई लोगों को काटकर घायल कर दिया है, जिसमें महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा शिकार बने हैं।

फल और सब्जी विक्रेताओं के ठेलों पर बंदर झपट्टा मारकर सामान उठा ले जाते हैं। स्थानीय दुकानदार और ठेले वाले भी इससे परेशान हैं। बंदरों की बढ़ती संख्या ने पूरे इलाके को आतंकित कर दिया है।

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वन विभाग और रेलवे प्रशासन पर सवाल
स्थानीय लोगों ने वन विभाग से बार-बार शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। रेलवे स्टेशन पर फैली गंदगी और यात्रियों की परेशानी की सूचना रेलवे अधिकारियों को दी गई है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

स्थानीय लोगों की प्रशासन से अपील
क्षेत्र के नागरिकों और यात्रियों ने जिला प्रशासन और वन विभाग से बंदरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को जल्द ही ठोस कदम उठाकर इस समस्या का समाधान करना चाहिए, ताकि नगरवासी और यात्री राहत की सांस ले सकें।

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