पूर्वांचल
भागवत कथा के पांचवें दिन उमड़ा आस्था का सैलाब
मऊ के कोपागंज नगर क्षेत्र स्थित अति प्राचीन बौरहवा महादेव मंदिर में चल रहे सप्तदिवसीय विष्णु महायज्ञ और भागवत कथा में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। आसपास के क्षेत्रों से लोग बड़ी संख्या में कथा सुनने पहुंच रहे हैं। कथा के दौरान श्रद्धालु झूमते-गाते दिखाई दिए।काशी से पधारे कथा वाचक पंडित उत्तम दास जी महाराज ने पांचवे दिन नंद के पुत्रों बलदाऊ और श्रीकृष्ण के नामकरण की कथा सुनाई। उन्होंने विस्तार से बताया कि यशोदा और रोहिणी ने गर्गाचार्य जी की परीक्षा लेने के लिए अपने-अपने बालकों की अदला-बदली की। इसके बावजूद, गर्गाचार्य जी ने तुरंत पहचान लिया कि रोहिणी की गोद में कृष्ण और यशोदा की गोद में बलराम हैं।
उन्होंने बलराम को “अथाह बल का सागर” और कृष्ण को “सहस्त्र नामों वाले” कहकर उनका नामकरण किया।परीक्षित जी के प्रश्न पर कि पूतना जैसी राक्षसी के शरीर को जलाने पर सुगंध क्यों आई, सूत जी ने कहा कि जिस प्रकार कमल के स्पर्श से हाथ सुगंधित हो जाता है।
प्रकार कृष्ण के स्पर्श से पूतना के शरीर से सुगंध आई। श्रीकृष्ण कमल नयन हैं जिनके स्पर्श से सब कुछ पवित्र और सुगंधित हो जाता है। सुबह यज्ञ, हवन और रुद्राभिषेक के साथ वैदिक मंत्रोच्चार होता है जबकि शाम को कथा और देर रात भस्म आरती का आयोजन किया जाता है।
इस कार्यक्रम में अभिषेक जी महाराज, धीरज त्रिपाठी, दिनेश जायसवाल, बृजेश गुप्ता, रवि कुमार साहू समेत कई लोग मौजूद रहे।
