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धर्म-कर्म

वाराणसी का नागलोक जहां कालसर्प दोष से मिलती है मुक्ति

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नाग पंचमी पर विशेष

नागेश्वर कुंड के बीचो-बीच नागकूपेश्वर महादेव का शिवलिंग है ! स्कंद पुराण के अनुसार महर्षि पतंजलि जो नाग के शेषावतार थे ! नागेश्वर कूप के रास्ते से नागलोक में जाकर तपस्या किया करते थे! महर्षि पतंजलि ने इस स्थान से योग सूत्र की रचना की थी और नागेश्वर महादेव की स्थापना की थी ! इस शिवलिंग के नीचे एक होल है जिसके 7 सात तल है जो धरती को नागलोक से जोड़ते है!

साल में एक दिन नाग पंचमी को नागेश्वर महादेव शिवलिंग के दर्शन के लिए नाग पंचमी के दिन नाग कूप का पानी पंप के जरिए खींच लिया जाता है तो वहां 70 फीट नीचे मौजूद शिवलिंग नागेश्वर महादेव स्पष्ट नजर आते हैं ! पानी निकाल कर नागेश्वर महादेव शिवलिंग की विधि विधान से पूजा की जाती है! वह भी कुछ घंटे के लिए क्योंकि कुछ घंटे के बाद अंदर दोबारा से कूप में पानी भरने लगता है ! स्कंद पुराण में इसे कारकोट नाग कुंड के नाम से जाना जाता है !

यह स्थान महर्षि पतंजलि की तपोभूमि के रूप में भी जाना जाता है! ऐसी मान्यता है कि आज भी नाग पंचमी के दिन महर्षि पतंजलि नाग के रूप में यहां आते हैं और नागकूपेश्वर महादेव शिवलिंग की परिक्रमा करते हैं! महर्षि पतंजलि ने यहां तपस्या की और योगसूत्र की रचना की जिसके कारण कारकोट नाग कूप की महत्ता और बढ़ जाती है! नाग पंचमी के दिन यहां दर्शन करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिल जाती है!

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