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वाराणसी

सहालग से पहले सोना-चांदी ने बढ़ाई चिंता, शादी का बिगड़ा बजट

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वाराणसी। सहालग का मौसम नजदीक आते ही वाराणसी के सराफा बाजार में सोना-चांदी की कीमतों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जिन घरों में शादी-ब्याह के मौके पर सोने-चांदी के आभूषणों का व्यवहार परंपरा से जुड़ा रहा है, वहां अब इस रस्म को निभाना जेब पर भारी पड़ने लगा है। बीते वर्षों में जिन परिवारों ने शादी में सोने के गहने दिए थे, वे अब उसी परंपरा को निभाने के लिए खुद को आर्थिक दबाव में महसूस कर रहे हैं।

सराफा बाजार में तेजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि करीब पांच साल पहले 10 ग्राम सोने की जंजीर, जो लगभग 40 हजार रुपये की पड़ती थी, अब करीब चार गुना कीमत तक पहुंच चुकी है। इस बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर वर पक्ष पर दिखाई दे रहा है। जिन परिवारों ने वधू के लिए पांच साल पहले करीब 10 लाख रुपये तक के गहनों की योजना बनाई थी, वही खर्च अब बढ़कर लगभग 40 लाख रुपये के आसपास पहुंचने से शादी वाले घरों में बजट बिगड़ता नजर आ रहा है। बुधवार को सोने के दाम में 6 हजार रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे में यदि आने वाले दस दिनों में भाव और बढ़ते हैं, तो सहालग में शादी करने वाले परिवारों की तैयारियां और अधिक कठिन हो सकती हैं।

सहालग के दौरान वाराणसी के सराफा बाजार में सोना और चांदी हमेशा से ग्राहकों को आकर्षित करते रहे हैं, लेकिन 2024-25 और जनवरी 2026 के बीच कीमतों में आए अंतर ने बाजार की तस्वीर बदल दी है। 2024-25 में भाव ऊंचे होने के बावजूद खरीदारी संतुलित रही थी, जबकि जनवरी 2026 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची कीमतों का सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है। मांग बनी हुई है, लेकिन खरीदारी का तरीका बदल गया है।

2024-25 के सहालग में वाराणसी में 24 कैरेट सोने की औसत कीमत 63 से 65 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच रही थी, जबकि चांदी 75 से 78 हजार रुपये प्रति किलो के आसपास थी। उस समय भी दाम बढ़े हुए थे, फिर भी लोगों ने परंपरा निभाने के लिए खरीदारी की। भारी गहनों की जगह हल्के डिजाइन और जरूरत के हिसाब से खरीद को प्राथमिकता दी गई, जिससे बाजार में रौनक बनी रही और कारोबारियों में संतोष दिखा।

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वहीं, 20 जनवरी 2026 को सहालग के बीच सोना 1,54,745 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 3,15,000 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई। इसके चलते बाजार में सतर्कता बढ़ गई है। सराफा कारोबारी किशोर सेठ के अनुसार, ग्राहक अब वजन घटाकर खरीदारी कर रहे हैं, पुराने गहनों की अदला-बदली या री-मेकिंग करा रहे हैं और कई लोग खरीद को फिलहाल टालने लगे हैं। इससे पहले 19 जनवरी 2026 को चांदी ने पहली बार तीन लाख रुपये का आंकड़ा पार करते हुए 3,05,000 रुपये प्रति किलो का स्तर छू लिया था।

सोने और चांदी की कीमतों में इस उछाल के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजारों की अस्थिरता, डॉलर की मजबूती, सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की बढ़ती मांग, भू-राजनीतिक तनाव, आयात लागत और टैक्स जैसे कारण बताए जा रहे हैं। वहीं चांदी के औद्योगिक उपयोग की बढ़ती मांग ने भी इसके दाम को ऊपर ले जाने में भूमिका निभाई है।

कुल मिलाकर, 2024-25 की तुलना में जनवरी 2026 में वाराणसी का सराफा बाजार ज्यादा महंगा होने के साथ-साथ अधिक सोच-समझकर खरीदारी करने वाला बन गया है। सहालग की परंपरा कायम है, लेकिन अब खरीदारी में चमक के साथ गणना भी जुड़ गई है। ग्राहक अब केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि अपनी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए गहनों का चयन कर रहे हैं, जिससे बाजार में नई सोच के साथ बदलाव साफ नजर आ रहा है।

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